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Varanasi Court: वाराणसी कचहरी में फर्जी अधिवक्ताओं पर कड़ा शिकंजा! सैकड़ों पर कार्रवाई

दीवानी से कलेक्ट्रेट तक सप्ताह में दो दिन चल रहा चेकिंग अभियान; बिना COP और बार रजिस्ट्रेशन के काला कोट पहनने वालों पर दर्ज होगी FIR।

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भदैनी मिरर वाराणसी डेस्क: वाराणसी कचहरी परिसर (दीवानी न्यायालय से लेकर कलेक्ट्रेट तक) में फर्जी वकीलों की धरपकड़ और पहचान के लिए अधिवक्ता जांच समिति ने अपना चेकिंग अभियान और तेज कर दिया है। पिछले चार वर्षों से चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत समिति सप्ताह में दो दिन कचहरी परिसर में सघन चेकिंग करती है।

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इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन अराजक तत्वों और फर्जी लोगों की पहचान करना है, जो बिना किसी वैध एलएलबी (LLB) डिग्री, बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन या सीओपी (COP) के अधिवक्ताओं की वेशभूषा—काला कोट, काला पैंट और सफेद शर्ट पहनकर कचहरी और थानों में घूमते हैं।

दलाली और फर्जीवाड़े पर लगाम, सैकड़ों पर हो चुकी है कार्रवाई

जांच दल के पदाधिकारियों के अनुसार, बिना किसी अर्हता के वकीलों की ड्रेस पहनकर घूमने वाले तत्व कचहरी परिसर और पुलिस थानों में दलाली, धोखाधड़ी और उपद्रव जैसी गतिविधियों में शामिल होकर असली वकीलों की साख को नुकसान पहुंचाते हैं।

  • कड़ी कानूनी कार्रवाई: पिछले चार वर्षों में जांच समिति ने सैकड़ों फर्जी अधिवक्ताओं को पकड़कर पुलिस के हवाले किया है, जिनमें से कई को अदालत से सजा भी मिल चुकी है।

  • चेतावनी के बाद FIR: समिति ने स्पष्ट किया है कि पहली बार पकड़े जाने पर चेतावनी दी जाती है, लेकिन दोबारा पकड़े जाने पर तुरंत पुलिस के सुपुर्द कर सख्त धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जा रही है।

LLB पास छात्रों और इंटर्न्स के लिए सख्त गाइडलाइंस

समिति ने इंटर्नशिप और वकालत सीखने के उद्देश्य से कचहरी आने वाले एलएलबी (LLB) अंतिम वर्ष के छात्रों और नए पास-आउट्स के लिए भी सख्त हिदायत जारी की है:

  • दो महीने की प्रैक्टिस का नियम: एलएलबी पास करने के बाद दो महीने की प्रैक्टिस के लिए छात्रों को बार एसोसिएशन को सूचित करना अनिवार्य होगा, जिसके बाद बार उन्हें प्रामाणित करेगा।

  • AIBE और बैंड लगाने की शर्त: ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास करने के बाद बार काउंसिल में पंजीकृत अधिवक्ता ही कोर्ट में पैरवी कर सकते हैं और वकीलों का 'बैंड' लगा सकते हैं।

  • ड्रेस कोड का पालन: एआईबीई (AIBE) पास न करने वाले या इंटर्नशिप कर रहे अभ्यर्थियों के लिए काली टाई या निर्धारित ड्रेस कोड का सुझाव दिया गया है। बिना आधिकारिक अनुमति के काला कोट पहनकर प्रैक्टिस करना पूरी तरह वर्जित है।

बिना रजिस्ट्रेशन दिखे तो करियर होगा बर्बाद

जांच समिति के सदस्यों (गौतम कुमार झा, दिवाकर दुबे, जय श्री पाठक) ने सचेत किया है कि यदि कोई छात्र या व्यक्ति बिना कॉलेज के आधिकारिक लेटर, बार में रजिस्ट्रेशन या पंजीकृत मुंशी के रूप में दर्ज हुए बिना अधिवक्ता के वेश में पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सीधे पुलिस केस (FIR) दर्ज कराया जाएगा।

यह दंडात्मक कार्रवाई संबंधित छात्र या व्यक्ति के भविष्य के कानूनी करियर के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो सकती है।