Varanasi Court News: 29.50 लाख की धोखाधड़ी के आरोप में लिपिक और चपरासी को बड़ी राहत! सत्र न्यायालय ने खारिज की निगरानी याचिका
वाराणसी के श्री युगल बिहारी इंटर कॉलेज के प्रबंधक द्वारा लगाए गए जमीन धोखाधड़ी के आरोपों पर अपर जिला जज (प्रथम) की अदालत का फैसला; निचली अदालत का आदेश रखा बरकरार।
भदैनी मिरर लीगल डेस्क। वाराणसी में जमीन बेचने के नाम पर 29.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी और हड़पने के आरोप का सामना कर रहे एक विद्यालय के वरिष्ठ लिपिक, चपरासी और उनके एक परिचित को अदालत से बड़ी राहत मिली है। अपर जिला जज (प्रथम) संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने इस मामले में दाखिल पुनरीक्षण (निगरानी) याचिका को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया है।
अदालत में आरोपित विवेक कुमार त्रिपाठी की ओर से उनके अधिवक्ता विकास सिंह ने पक्ष रखा और निचली अदालत के आदेश को न्यायसंगत बताया।

क्या था पूरा मामला?
मामला वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र के सिकरौल निवासी और श्री युगल बिहारी इंटर कॉलेज (रामेश्वर) के प्रबंधक धर्मेंद्र कुमार सिंह से जुड़ा है।
* आरोप: प्रबंधक धर्मेंद्र कुमार सिंह ने आरोप लगाया था कि उन्हें जमीन की आवश्यकता थी। इसी दौरान उनके विद्यालय के वरिष्ठ लिपिक सुनील द्विवेदी और चपरासी अवनीश कुमार सिंह ने उन्हें जंसा के भतसार निवासी अपने परिचित विवेक कुमार त्रिपाठी से मिलवाया।
* जमीन बेचने का झांसा: उन्होंने बताया कि विवेक के बाबा रामयश त्रिपाठी अपनी जमीन बेचना चाहते हैं।
* लाखों रुपये का लेनदेन: कर्मचारियों की बातों पर भरोसा करके धर्मेंद्र ने अलग-अलग तिथियों में विवेक और सुनील के बैंक खातों में कुल 29.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
धमकी देने और पैसा न लौटाने का आरोप
प्रबंधक का आरोप था कि पैसे लेने के बाद आरोपी जमीन की रजिस्ट्री करने में आनाकानी करने लगे। जब उन्होंने अपना पैसा वापस मांगा या दबाव बनाया, तो उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।
इसके बाद पीड़ित प्रबंधक ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 156(3) के तहत निचली अदालत में प्राथमिकी दर्ज कराने का प्रार्थना पत्र दिया था। हालांकि, निचली अदालत ने मामले के तथ्यों को देखते हुए याचिका को खारिज कर दिया था।
सत्र न्यायालय ने भी बरकरार रखा निचली अदालत का फैसला
निचली अदालत से झटका लगने के बाद प्रबंधक धर्मेंद्र कुमार सिंह ने सत्र न्यायालय का रुख किया और पुनरीक्षण (निगरानी) याचिका दायर की।
मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद अपर जिला जज (प्रथम) संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने माना कि निचली अदालत का आदेश सही था, जिसके बाद अदालत ने इस निगरानी याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इस फैसले से आरोपी लिपिक, चपरासी और विवेक कुमार त्रिपाठी को विधिक रूप से बड़ी राहत मिल गई है।
