Varanasi Court: कथित अपहरण मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, सुजीत कुमार को मिली जमानत; बालिग निकली किशोरी
भदैनी मिरर डेस्क, वाराणसी: जनपद के रोहनिया थाना क्षेत्र से जुड़े एक कथित अपहरण और विवाह के मामले में वाराणसी सत्र न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले के तमाम तथ्यों और साक्ष्यों को देखने के बाद अभियुक्त सुजीत कुमार की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इस मामले में युवती के बालिग होने और उसकी सहमति के तर्कों ने आरोपी के पक्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


क्या था मामला: शादी के इरादे से भगाने का लगा था आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादिनी सरिता ने रोहनिया थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी पुत्री (कथित उम्र 17 वर्ष), जो धनपालपुर में रहकर पढ़ाई कर रही थी, 12 मार्च 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि सुजीत कुमार उसे शादी के झांसे में लेकर बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। पुलिस ने इस मामले में BNS की धारा 137(2) और 87 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

अदालत में पलटा मामला: इन दलीलों ने दिलाई राहत
सुनवाई के दौरान अभियुक्त के अधिवक्ता नीरज कुमार गुप्ता 'धीराय' और विनीत कुमार सिंह ने कोर्ट के समक्ष कई पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत किए:
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उम्र का साक्ष्य: FIR में पीड़िता को नाबालिग बताया गया था, लेकिन आधार कार्ड [redacted] के अनुसार उसकी जन्म तिथि 02-04-2007 दर्ज है। इस आधार पर घटना के वक्त पीड़िता की उम्र करीब 19 वर्ष यानी 'बालिग' सिद्ध हुई।
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सहमति और विवाह: पीड़िता ने धारा 164 के बयानों में स्वीकार किया कि उसने खुद सुजीत को फोन कर बुलाया था। दोनों अपनी मर्जी से दिल्ली गए और प्रयागराज के एक शिव मंदिर में वैदिक रीति-रिवाज से विवाह किया।
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नहीं हुआ शोषण: पीड़िता ने स्पष्ट किया कि उनके बीच कोई जबरदस्ती या गलत काम नहीं हुआ है, बल्कि वे पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे थे।
न्यायालय का फैसला
माननीय न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और पीड़िता के 'बालिग' होने के साक्ष्य को देखते हुए मामले को जमानत के योग्य माना। कोर्ट ने 50,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र (Personal Bond) और उतनी ही राशि की दो प्रतिभूतियों (Security) पर सुजीत कुमार को रिहा करने का आदेश जारी किया।

