वाराणसी: संकट मोचन संगीत समारोह में ‘चंदन किवाड़’ का लोकार्पण
पहली बार ‘साहित्य मंच’ की शुरुआत, संगीत, कला और साहित्य के संगम पर हुई परिचर्चा
Updated: Apr 6, 2026, 22:23 IST
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वाराणसी। वाराणसी में आयोजित प्रसिद्ध संकट मोचन संगीत समारोह के पहले दिन एक नई परंपरा की शुरुआत हुई। इस बार पहली बार ‘साहित्य मंच’ का आयोजन किया गया, जहां प्रसिद्ध लोकगायिका मालिनी अवस्थी की पुस्तक ‘चंदन किवाड़’ का लोकार्पण सह परिचर्चा कार्यक्रम संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में बतौर वक्ता उपस्थित मालिनी अवस्थी ने कहा कि यह उनके लिए भगवान राम की कृपा है कि वह इस प्रतिष्ठित मंच पर गायिका के साथ-साथ एक लेखक के रूप में उपस्थित हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी कलाकार यदि साहित्य का अध्ययन नहीं करता है, तो वह लंबे समय तक नहीं टिक सकता। उन्होंने आधुनिक दौर के गायकों को सलाह देते हुए साहित्य से जुड़ने पर जोर दिया।


उन्होंने अपने आत्म वक्तव्य में कहा कि जब उन्होंने मन के उद्गारों को लिखने का निर्णय लिया, तब उनके सामने बनारस की छवि थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि संकट मोचन परिसर में साहित्य का मंच भी बनेगा। इस अवसर पर उन्होंने अपनी पुस्तक की कुछ पंक्तियां पढ़कर उसकी मूल भावना से श्रोताओं को परिचित कराया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र ने कहा कि अब तक यहां संगीत के कार्यक्रम होते रहे हैं, लेकिन साहित्य की यह पहल एक नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि संगीत और कला को सही ढंग से समझने के लिए साहित्य की समझ आवश्यक है। यह मंच संगीत, कला और साहित्य के अद्वितीय संगम का प्रतीक है और भविष्य में इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा।

मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ कवि प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने ‘चंदन किवाड़’ को एक सच्चे कलाकार की स्मृति कथा बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल एक कलाकार की कहानी नहीं, बल्कि अनेक अनाम स्त्रियों की आवाज को सामने लाती है। उन्होंने इसे समाजशास्त्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण कृति बताते हुए कहा कि इसमें वेदना और वंदन दोनों का अद्भुत समावेश है।
स्वागत वक्तव्य में प्रो. विजयनाथ मिश्र ने कहा कि भगवान संकट मोचन के आशीर्वाद से इस नए साहित्यिक कार्यक्रम की शुरुआत हुई है और यह आयोजन आने वाले समय में नई दिशा देगा।
युवा कवि एवं रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल ने मालिनी अवस्थी के व्यक्तित्व और लेखन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वह शास्त्र के बीच लोक की आवाज को मजबूती से प्रस्तुत करती हैं। उनके लेखन में निर्भय प्रेम और समाज के प्रति गहरी संवेदना दिखाई देती है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमित पांडेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने किया।
इस आयोजन के साथ ही संकट मोचन संगीत समारोह में साहित्य की नई धारा जुड़ गई है, जिससे आने वाले समय में यह मंच और अधिक समृद्ध और व्यापक होने की उम्मीद है।
