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वाराणसी: नाव पर इफ्तार पार्टी विवाद में आरोपियों को झटका, कोर्ट ने खारिज की जमानत अर्जी

नाविक को धमकी और गंगा में अवशेष फेंकने का मामला

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वाराणसी। शहर में चर्चित नाव पर इफ्तार पार्टी मामले में आरोपियों को सोमवार को बड़ा झटका लगा। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार यादव की अदालत ने आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने आरोपियों को जमानत देने का कड़ा विरोध किया, जिसके बाद कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया।

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नई धाराओं के बाद मामला हुआ गंभीर

इस प्रकरण में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पहले से दर्ज धाराओं में और गंभीर धाराएं जोड़ दी थी। आरोप है कि आरोपियों ने नाविक को जान से मारने की धमकी दी और नाव पर कब्जा करने की कोशिश की। इसके अलावा मामले में आईटी एक्ट के तहत भी धाराएं बढ़ाई गई हैं। इन नई धाराओं के जुड़ने के बाद कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपियों को जेल भेजने का आदेश दिया था।

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 क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि बीते दिनों गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी के दौरान मांसाहार के अवशेष फेंके जाने का आरोप सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। शुरुआती कार्रवाई में सभी को शांतिभंग की आशंका के तहत जिला जेल भेजा गया था।
बीते गुरुवार को कोर्ट के आदेश पर सभी आरोपियों को वज्र वाहन के जरिए अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोप पूरी तरह निराधार हैं और आरोपियों को फर्जी तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में कोई ठोस साक्ष्य नहीं है।

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वहीं, सरकारी अधिवक्ता ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत का विरोध किया और कहा कि आरोपियों का कृत्य कानून-व्यवस्था और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील मामला है।
 

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