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वाराणसी: कोर्ट के आदेश के बाद मुर्दहा चौकी प्रभारी संध्या जायसवाल समेत पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज, ACP करेंगे जांच

रात में जबरन घर में घुसने, जातिसूचक शब्द बोलने और युवक को 24 घंटे अवैध हिरासत में रखने का आरोप; BNS और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज 

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वाराणसी, भदैनी मिरर। वाराणसी की विशेष अदालत के कड़े रुख और स्पष्ट निर्देशों के बाद आखिरकार चोलापुर थाने की पुलिस ने मुर्दहा पुलिस चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक (SI) संध्या जायसवाल और अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मामले की निष्पक्ष विवेचना का जिम्मा सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) सारनाथ, विनय कुमार द्विवेदी को सौंपा गया है।

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पीड़िता सुशीला देवी (निवासी ग्राम दसनीपुर, चोलापुर) द्वारा अदालत में दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है।

BNS और SC/ST एक्ट की गंभीर धाराओं में केस दर्ज

अदालत के आदेश पर चोलापुर थाने में अभियुक्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 127 (2), 115 (2), 333 और एससी/एसटी निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(घ) के तहत केस दर्ज किया गया है।

24 घंटे अवैध कस्टडी और जातिसूचक टिप्पणी

पीड़िता सुशीला देवी द्वारा अदालत के समक्ष दिए गए तहरीर के अनुसार 22 जुलाई 2026 की तड़के लगभग 2 से 3 बजे के बीच, उपनिरीक्षक संध्या जायसवाल अन्य पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ उनके घर में जबरन घुस आईं। महिलाओं के घर में होने के बावजूद बिना किसी पूर्व सूचना या महिला आरक्षी के प्रवेश किया गया। विरोध करने पर पुलिस अधिकारियों ने परिवार को जातिसूचक अपशब्द कहे और सो रहे पुत्र रोहित कुमार गौतम को जबरन उठाकर ले गए। आरोप है कि पुलिसकर्मी फर्जी मुकदमे में फंसाने की नीयत से उसे ले गए।

पीड़िता का आरोप है कि उसके बेटे को 24 घंटे से अधिक समय तक थाने में अवैध रूप से छिपाकर रखा गया। 22 जुलाई की रात को पकड़े जाने के बाद अगले दिन 23 जुलाई की तड़के 2 बजे गिरफ्तारी दिखाई गई। पीड़िता ने घटना के तुरंत बाद ही सुबह जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके अलावा, वकील से हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग, पेनड्राइव और ट्रांसक्रिप्ट भी साक्ष्य के तौर पर कोर्ट में पेश किए गए, जिसमें दरोगा द्वारा धारा बताए बिना कार्रवाई करने की बात सामने आई है।

कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

पीड़िता ने तहरीर में उल्लेख किया कि स्थानीय थाने, पुलिस आयुक्त (कमिश्नरेट वाराणसी), जिला मजिस्ट्रेट, और पुलिस महानिदेशक (DGP UP) तक लिखित और पंजीकृत डाक से शिकायत भेजने के बावजूद जब पुलिस विभाग ने अपनी ही साथी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तब उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

मामले में कोर्ट ने पुलिस की शुरुआती जांच आख्या में भारी विरोधाभास पाया और स्पष्ट किया था कि चोलापुर थाना प्रभारी इस मामले की जांच नहीं करेंगे। अब एसीपी विनय कुमार द्विवेदी मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच करेंगे।