Varanasi: बाढ़ के 64 दिनों बाद अपने मूल स्वरूप में लौटेगी मां गंगा की दिव्य आरती
जलस्तर घटने और सफाई कार्य पूरा होने के बाद पारंपरिक स्थल पर होगी वापसी; बाढ़ के दौरान समिति की छत पर जारी रही थी आरती
वाराणसी (भदैनी मिरर): गंगा नदी में आई बाढ़ के कारण पिछले 64 दिनों से अपने पारंपरिक स्थल से दूर चल रही मां गंगा की भव्य और दिव्य आरती अब पुनः अपने मूल स्वरूप में प्राचीन दशाश्वमेध घाट पर लौटने जा रही है। गंगा का जलस्तर कम होने और घाट पर जमी सिल्ट व गंदगी की सफाई के बाद प्रशासन व आयोजन समिति ने यह निर्णय लिया है।

बाढ़ के दौरान भी अनवरत जारी रही थी आरती
गौरतलब है कि मानसून के दौरान गंगा में आए उफान और बाढ़ के कारण श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए दशाश्वमेध घाट जलमग्न हो गया था। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में गंगोत्री सेवा समिति ने परंपरा को खंडित न होने देते हुए समिति की छत पर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत मां गंगा की दैनिक आरती का क्रम लगातार जारी रखा था।
अब जबकि जलस्तर पूरी तरह सामान्य हो चुका है और नगर निगम व समिति द्वारा घाट की साफ-सफाई और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर लिया गया है, तो आरती अपने पुराने और भव्य पारंपरिक स्थल पर वापस लौट रही है।
श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल
काशी की गंगा आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और जनआस्था का एक विशिष्ट प्रतीक है। इसमें शामिल होने के लिए प्रतिदिन देश और दुनिया के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु दशाश्वमेध घाट पहुंचते हैं।
अपने पारंपरिक घाट पर मां गंगा की आरती की वापसी से काशीवासियों और पर्यटकों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। यह वापसी इस बात का प्रमाण है कि काशी की सांस्कृतिक विरासत और अगाध आस्था विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी कभी डिगती नहीं है।


