Varanasi : चिरईगांव में प्रसूता की मौत के बाद एक्शन, गैर-कानूनी अस्पताल सील; जांच कमेटी गठित
सीएमओ के निर्देश पर एडिशनल सीएमओ की टीम ने शुरू की जांच; आशा कार्यकत्री और निजी अस्पताल पर लापरवाही के गंभीर आरोप।
भदैनी मिरर (डिजिटल डेस्क), वाराणसी: वाराणसी जिले के चौबेपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रुस्तमपुर स्थित 'अभय क्लीनिक एंड हॉस्पिटल' में प्रसूता की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित निजी अस्पताल को सील कर दिया। इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. मुकेश कुमार के निर्देश पर मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है।


कबीरचौरा रेफरल के बाद भी निजी अस्पताल ले गई आशा कार्यकत्री
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत नेवादा (दलित बस्ती) की निवासी 22 वर्षीय कंचन को प्रसव पीड़ा होने पर स्थानीय आशा कार्यकत्री पहले चिरईगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) ले गई थी। वहां तैनात डॉक्टरों ने स्थिति को जोखिम भरा (हाई रिस्क प्रेगनेंसी - HRP) पाते हुए महिला को कबीरचौरा स्थित मंडलीय महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया था।

आरोप है कि सरकारी अस्पताल के स्पष्ट निर्देश के बावजूद आशा कार्यकत्री मरीज को बहला-फुसलाकर रुस्तमपुर के 'अभय क्लीनिक एंड हॉस्पिटल' नामक निजी अस्पताल ले गई। वहां प्रसव के दौरान स्थिति बिगड़ने से महिला की दर्दनाक मौत हो गई।
परिजनों का हंगामा और पुलिस कार्रवाई
घटना से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने सोमवार को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन व चक्काजाम किया था। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। पुलिस ने पीड़ित पक्ष की तहरीर पर संबंधित डॉक्टर समेत दो लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

सीएमओ ने दिए जांच के आदेश, बयान दर्ज
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के तहत एडिशनल सीएमओ डॉ. हरिश्चंद्र मौर्या के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने चिरईगांव पीएचसी पहुंचकर वहां मौजूद डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के बयान दर्ज किए हैं। सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में ढिलाई बरतने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
