Varanasi: हथियार तस्करी के बड़े सिंडिकेट मामले में पुलिस को झटका ! दबोचे गए आरोपी को 48 घंटे में मिली जमानत
Varanasi News: हथियार तस्करी मामले में पुलिस को बड़ा झटका, कतारी अंडरपास से गिरफ्तार आरोपी को 48 घंटे में मिली जमानत
वाराणसी, भदैनी मिरर:
पूर्वांचल के शूटरों, लुटेरों और शातिर अपराधियों को अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाले जिस अंतरराज्यीय सिंडिकेट का वाराणसी पुलिस ने पर्दाफाश करने का दावा किया था, उस मामले में पुलिस को तगड़ा झटका लगा है। चोलापुर पुलिस और एसओजी (SOG) की संयुक्त टीम द्वारा कतारी ब्लॉक अंडरपास से गिरफ्तार किए गए सात तस्करों में से एक मुख्य आरोपी को गुरुवार दोपहर वाराणसी कोर्ट से जमानत मिल गई। महज 48 घंटे के भीतर आरोपी को मिली इस राहत के बाद पुलिस की लचर रिपोर्ट और अभियोजन की कमजोर दलीलों पर सवाल खड़े होने लगे हैं।


ACJM (प्रथम) की अदालत से मिली राहत
गुरुवार को वाराणसी कोर्ट के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम) की अदालत ने चोलापुर थाना क्षेत्र से जुड़े इस आर्म्स एक्ट के मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने शिवरामपुर (थाना चोलापुर) निवासी आरोपी आभाष सिंह को तीस हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र (बॉन्ड) पर रिहा करने का आदेश जारी किया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नागेश्वर प्रसाद आकाश, संत कुमार राय और दीपक मिश्रा ने मजबूती से पक्ष रखा।

क्या था पुलिस का दावा और बरामदगी?
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि बीती 16 जून 2026 को पुलिस टीम ने कतारी ब्लॉक के पास अंडरपास में अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त की सटीक सूचना पर घेराबंदी की थी। पुलिस ने मौके से अखिलेश उर्फ मोनू राजभर, अरुण राजभर, नमन मिश्र, दिलीप कुमार सिंह, शैलेश सिंह, हिमांशु कुमार उर्फ सनी और अनिकेत चौहान सहित अन्य को रंगे हाथों पकड़ने का दावा किया था। पुलिस के अनुसार, इनके पास से अलग-अलग बोर की पांच पिस्तौल, तमंचे, भारी मात्रा में जिंदा कारतूस, चोरी की एक मोटरसाइकिल, 7 मोबाइल फोन और अपराधियों से जुड़े अहम दस्तावेज व डेटा बरामद किए गए थे।

पुलिस का यह भी दावा था कि यह गिरोह सोशल मीडिया के जरिए अपना नेटवर्क खड़ा कर अपराधियों को अवैध हथियार बेचता था।
आपराधिक इतिहास न होना और पुख्ता साक्ष्यों की कमी पड़ी भारी
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि आरोपी आभाष सिंह पूरी तरह निर्दोष है। उसे केवल परेशान करने और पुरानी रंजिश के चलते इस मामले में घसीटा गया है। कोर्ट के समक्ष यह मुख्य तथ्य भी सामने आया कि आरोपी का पूर्व में कोई भी आपराधिक इतिहास (Criminal History) नहीं है।
अभियोजन नहीं दे सका मजबूत सबूत जब जज ने जमानत अर्जी का विरोध करने के लिए अभियोजन पक्ष से आरोपी के खिलाफ ठोस और मजबूत साक्ष्य मांगे, तो सरकारी अमला कोर्ट को संतुष्ट करने वाले दस्तावेज या आपराधिक रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका। इसके बाद अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी को स्वीकार कर लिया।
बाकी 6 आरोपियों की रिहाई का रास्ता साफ!
पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से जहां एक तरफ क्षेत्र के अपराधियों में हड़कंप मचा था, वहीं इस मामले के पहले ही आरोपी को महज 48 घंटे में जमानत मिलने से पुलिस महकमे में मायूसी है। विधिक जानकारों का मानना है कि इस केस के एक आरोपी को जमानत मिलने के बाद अब जेल में बंद अन्य 6 आरोपियों की रिहाई का कानूनी रास्ता भी बेहद आसान हो गया है।
