वाराणसी: ₹50 करोड़ के जमीन विवाद में नया मोड़, पीड़ित के वकील का दावा- 'साजिश के तहत हड़पी रिटायर्ड शिक्षक की संपत्ति
पावर ऑफ अटॉर्नी और दानपत्र के खेल से करोड़ों की हेराफेरी का आरोप; भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह समेत 10 पर रोहनिया थाने में दर्ज है मुकदमा।
वाराणसी: धर्म नगरी काशी में करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की प्राइम लैंड (जमीन) से जुड़े बहुचर्चित विवाद में अब पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता का एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बयान सामने आया है। पीड़ित परिवार के अधिवक्ता ने दावा किया है कि यह मामला कोई साधारण या आम पारिवारिक विवाद नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी और सुनियोजित साजिश के तहत एक रिटायर्ड शिक्षक की करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति को हड़पने का बड़ा खेल है [cite: अधिवक्ता ने दावा किया कि यह कोई सामान्य पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश के तहत रिटायर्ड शिक्षक की करोड़ों रुपये की संपत्ति हड़पने का मामला है।]।


अधिवक्ता का गंभीर आरोप है कि इस पूरे जालसाजी में सरकारी दस्तावेजों का खुलेआम दुरुपयोग किया गया और पीड़ित परिवार के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की गई है [cite: उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम में दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया और पीड़ित परिवार के साथ धोखाधड़ी की गई।]।

कोर्ट के आदेश पर रोहनिया थाने में दर्ज हुआ है मुकदमा
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय के आदेश पर वाराणसी के रोहनिया थाने में एफआईआर दर्ज की गई है [cite: अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में कोर्ट के आदेश के बाद रोहनिया थाने में भाजपा के वाराणसी जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह, नितेश राय उर्फ सोनू समेत कुल 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।]। इसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वाराणसी जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह और नितेश राय उर्फ सोनू समेत कुल 10 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है [cite: अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में कोर्ट के आदेश के बाद रोहनिया थाने में भाजपा के वाराणसी जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह, नितेश राय उर्फ सोनू समेत कुल 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।]।

वकील ने कहा कि मुकदमा दर्ज होने के बाद अब पुलिस इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले की निष्पक्षता से विवेचना कर रही है और उन्हें देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि सच जल्द ही सामने आएगा [cite: उन्होंने कहा कि अब पुलिस निष्पक्ष विवेचना कर रही है और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।]।
पावर ऑफ अटॉर्नी और दानपत्र का 'अनोखा' खेल
अधिवक्ता ने इस बड़ी धोखाधड़ी के पीछे की पूरी क्रोनोलॉजी को समझाते हुए गंभीर आरोप लगाए [cite: पीड़ित पक्ष के वकील का आरोप है कि पहले पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई गई और बाद में उसे एक ही दिन में निरस्त कर दिया गया।]:
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पहले बनी पावर ऑफ अटॉर्नी: उनका आरोप है कि पहले सुनियोजित तरीके से पीड़ित की पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई गई [cite: पीड़ित पक्ष के वकील का आरोप है कि पहले पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई गई और बाद में उसे एक ही दिन में निरस्त कर दिया गया।]।
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एक ही दिन में निरस्त: इसके बाद खेल रचते हुए महज एक ही दिन के भीतर उस पावर ऑफ अटॉर्नी को निरस्त (कैंसिल) भी कर दिया गया [cite: पीड़ित पक्ष के वकील का आरोप है कि पहले पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई गई और बाद में उसे एक ही दिन में निरस्त कर दिया गया।]।
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दानपत्र और रजिस्ट्री का खेल: निरस्त करने के तुरंत बाद कथित रूप से दानपत्र और रजिस्ट्री की कागजी प्रक्रिया को इतनी तेजी से पूरा किया गया कि करोड़ों रुपये की इस बहुमूल्य संपत्ति को ट्रांसफर (हस्तांतरण) कर दिया गया [cite: इसके बाद कथित रूप से दानपत्र और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर करोड़ों रुपये की संपत्ति का हस्तांतरण किया गया।]।
अधिवक्ता का कहना है कि यदि इस पूरे कागजी घटनाक्रम की फोरेंसिक और गहन जांच कराई जाए, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
पीड़ित परिवार पर दबाव, जान का खतरा!
जमीन हड़पने के आरोपों के साथ ही अधिवक्ता ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर भी बेहद गंभीर चिंता जताई है [cite: अधिवक्ता ने यह भी दावा किया कि पीड़ित परिवार को लगातार दबाव का सामना करना पड़ रहा है और पीड़ित की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंका है।]। उन्होंने दावा किया कि आरोपियों द्वारा पीड़ित परिवार पर लगातार केस वापस लेने और समझौता करने का भारी दबाव बनाया जा रहा है [cite: अधिवक्ता ने यह भी दावा किया कि पीड़ित परिवार को लगातार दबाव का सामना करना पड़ रहा है]। अधिवक्ता ने प्रशासन से पीड़ित परिवार की सुरक्षा की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील की है।
भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी तरफ, इस पूरे मामले पर राजनीति भी तेज हो गई है। मुकदमे में नामजद मुख्य आरोपी और भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह पहले ही मीडिया के सामने आकर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बता चुके हैं [cite: गौरतलब है कि इससे पहले भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह मीडिया के सामने आकर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बता चुके हैं।]।
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भतीजे को दान की जमीन: सुरेश सिंह का पक्ष है कि जमीन के जो वास्तविक मालिक थे, उन्होंने पूरी तरह अपनी मर्जी और होशोहवास में जमीन अपने सगे भतीजे को दान की थी।
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पारिवारिक विवाद: उन्होंने दावा किया कि उसी दिन नियमनुसार उनके पक्ष में रजिस्ट्री भी कराई गई थी। यह पूरी तरह से एक पारिवारिक विवाद है, जिसमें उन्हें राजनीतिक विद्वेष के चलते जबरन घसीटा जा रहा है [cite: सुरेश सिंह ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा है कि पारिवारिक विवाद के कारण उन्हें राजनीतिक रूप से फंसाया जा रहा है।]।
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विपक्ष पर साधा निशाना: भाजपा नेता ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बिना पुलिस जांच पूरी हुए इस मामले पर सियासी रोटियां सेंकी जा रही हैं। उन्होंने गलत बयानबाजी करने वालों के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है।
