वाराणसी : महामना की तपोभूमि में सर सुंदरलाल अस्पताल के डाक्टरों की भूमिका की हो उच्चस्तरीय जांच
महामना के उद्देश्यों के खिलाफ जाकर मरीजों को महंगी दवाएं, इंजेक्शन क्यों लिख रहे डाक्टर
मरीजों के भोजन, जांच में हो रहा गड़बड़झाला, शिकायतों के बाद भी मौन है चिकित्सालय प्रशासन
महामना के उद्देश्यों के अनुरूप डाक्टर करें आचरण, अवैध कमाई का जरिया नही हैं मरीज
वाराणसी, भदैनी मिरर। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित सुंदरलाल अस्पताल में भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्रों ने बुधवार को मधुबन में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि सर सुंदरलाल चिकित्सालय में भ्रष्टाचार व्याप्त है। कहा कि सर सुंदरलाल चिकित्सालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर हम लोगों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से भी मिले। लेकिन हमारी शिकायतों को हल्के में ले लिया गया। बीएचयू प्रशासन ने इतने बड़े गंभीर आरोप को अनुसना कर दिया। कोई कार्रवाई नहीं हुई। अस्पताल में भर्ती मरीजों को भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय, जैसा की टाटा कैंसर अस्पताल, रेलवे अस्पताल, इएसआई अस्पताल और ट्रामा सेंटर में है। छात्रों ने अपने स्तर पर जांच-पड़ताल के बाद अपनी प्रमुख मांगों को मीडिया के सामने रखा।



1. छात्र स्वास्थ्य सेवा संकुल में ओपीडी का समय खून संग्रह का समय और साथ साथ आपातकालीन ओपीडी का भी समय बढ़ाया जाय। ताकि छात्रों व कर्मचारियों को सुविधा मिल सके।
2. सभी खून संबंधी जांच की रिपोर्ट समस्त मरीज / परिजनों को मोबाइल फोन या ईमेल पर दी जाय जैसा कि देश के अन्य प्रतिष्ठित अस्पतालों प्रदान कर रहे हैं।
3. एक्स-रे, एमआरआई और सीटी स्कैन की फिल्म भी समस्त मरीज / परिजनों को मोबाइल फोन या ईमेल पर दी जानी चाहिए। ऐसा देश के अन्य प्रतिष्ठित अस्पतालों में होता है। यहां के चिकित्सक यह पारदर्शिता क्यों नही अपना पाते। इसके पीछे गहरा रहस्य है।
4. एक्स-रे और यूएसजी, एमआरआई व सीटी स्कैन की भी वेटिंग कम की जाय।
5. एक्स-रे, सीटी आईडीएसयू/एमआरआई के शुल्क एम्स के अनुरूप के अनुरूप कम किया जाय।
6. वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए एंटीबायोटिक व अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की जाय।
7. आईसीयू में एडमिशन व डिस्चार्ज की नीति सार्वजनिक होनी चाहिए।
8. आईसीयू में मरीजों के परिजनों से महगी दवाएं और खून जांच बाहर से क्यों मंगवा रहे हैं डॉक्टर, इसकी गहन जांच हो। इसमें बहुत खामियां और मनमानापन है।
9. सबसे अहम सवाल यह कि बाहरी दलाल डॉक्टर्स के चैम्बर में पर्चा क्यों बाटते है? इसकी जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाय।
10. आये दिन डॉक्टर व प्रशासन मरीजों से बाहर से रॉड/प्लेट/स्कूलेंस ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले ट्यूब/कैंसर सेंकाई में लगने वाली जाली कान के ऑपरेशन में प्रयुक्त होने वाले उपकरण को बाहर से क्यों मंगवाते हैं। इसमें पूरी आशंका है कि दवा कम्पनियों और उनके दलालों के इशारे पर चिकित्सक और उनके सहयोगी इस अवैध कारोबार के हिस्सा है। इसका खुलासा होना चाहिए।
11. मरीजों को महंगे इंजेक्शन (10 से 20 हजार प्रतिदिन) पर्चे पर लिखे जा रहे हैं। यह महज कमीशनखोरी को खेल है। इसे तत्काल बंद किया जाय। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
12. अस्पताल में समुचित पार्किंग की व्यवस्था की होनी चाहिए।
13. सीनियर डॉक्टर्स शाम/रात को इमरजेंसी का निरीक्षण करें, (सभी डॉक्टर को विश्विद्यालय करीब दस हजार रुपये भत्ता देता है, रात के समय अस्पताल आने के लिए)। इसकी भी रोज जांच होनी चाहिए कि भत्ता लेने के बावजूद वह रात आते हैं या नही।
14. ओपीडी में विश्वविद्यालय के कर्मचारियों एवं छात्रों की हेल्थ डायरी को प्राथमिकता दी जाय।

निष्पक्षता से हो जांच तो खुलेंगे कई रहस्य
छात्रों ने कहाकि यदि इन विंदुओं की निष्पक्षता से जांच करा दी जाय तो कई ऐसे रहस्य खुलेंगे कि लोगों की आखें फटी रह जाएंगी। दवा कम्पनियों और कथित डाक्टरों के मरीज को मोटी कमाई का जरिया बनानेवाले ‘यमराजों‘ का भेद खुल जाएगा। हम छात्र महामना के इस आंगन में इस तरह के अवैध कार्य को होने नही देंगे। महामना ने आमलोगों को निरोगी बनाने और मेडिकल की शिक्षा हासिल करने के लिए सर सुंदरलाल अस्पताल का आधारशिला रखी थी। यहां मोटी वेतन पाने के बाद लाखों की कमाई के चक्कर में मरीज महज वसूली का जरिया बनकर रह गया है। उसकी जिंदगी की कीमत कम और उससे कमाए गये रूपये की अहमियत ज्यादा हो गयी है। यह दुनिया के आदर्श पुरूष महामना पंडित मदनमोहन मालवीय की धरती पर हम किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नही करेंगे। जब तक यह अस्पताल महामना की पवित्र विचारधारा को आत्मसात नही करते तबतक हम छात्र चैन से नही बैठने वाले। यदि मेडिकल के छात्र यहां हैं तो अन्य विभागों से जुड़े हम भी छात्र हैं। सबका बराबर का हक है। मेडिकल के प्रोफेसर, डाक्टर या छात्र अपने कां ‘अवतारी‘ या भगवान समझने की भूल न करें।

