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वाराणसी: अस्सी घाट पर घुंघरुओं की थाप और भक्ति का संगम; 'घाट संध्या' में बंगाल की सृजिता और तनिमा ने पेश की नृत्य प्रस्तुति

मास्टर शिव के नेतृत्व में कलाकारों ने शिव स्तुति और तांडव से बांधा समां

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वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी के अस्सी घाट पर 'सुबह-ए-बनारस' आनंद कानन द्वारा आयोजित 'घाट संध्या' का मंच गुरुवार को शास्त्रीय नृत्य की कलात्मक आभा से आलोकित हो उठा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं और तालबद्धता से संपूर्ण वातावरण को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।

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शिव वंदना से पुलकित हुई संध्या

कथक गुरु मास्टर शिव (लखनऊ घराना) के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल से पधारीं सृजिता सरकार, तनिमा सरकार और शालिनी ने मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का आकर्षण शिव तांडव, शिव स्तुति और शिव वंदना रही। सृजिता सरकार ने जहाँ भरतनाट्यम की बारीकियों से दर्शकों को रूबरू कराया, वहीं तनिमा और शालिनी ने कथक की मोहक प्रस्तुति दी। कलाकारों की जुगलबंदी और पदचाप की धमक पर घाट पर मौजूद कला प्रेमियों ने तालियों की गड़गड़ाहट से आशीर्वाद प्रदान किया।

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"काशी की विरासत तीनों लोकों में न्यारी"

प्रस्तुति से पूर्व मास्टर शिव ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "भगवान शिव की सबसे प्रिय नगरी और गंगा मैया के सानिध्य में नृत्य करना किसी सौभाग्य से कम नहीं है। काशी की संस्कृति केवल राष्ट्र ही नहीं, बल्कि तीनों लोकों में अलौकिक है। एक कलाकार के लिए घाट संध्या जैसा मंच मिलना उसकी वर्षों की तपस्या के सफल होने जैसा है।"

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बंगाल से बनारस तक की कला यात्रा

पहली बार बनारस के मंच पर उतरीं सृजिता सरकार ने आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गंगा के किनारे महादेव की कृपा से यह अवसर मिलना उनके लिए एक नया और अविस्मरणीय अनुभव है। उन्होंने बताया कि गंगा की लहरों के सामने नृत्य करना उनके जीवन की सबसे सुखद अनुभूतियों में से एक है।

कार्यक्रम के अंत में मास्टर शिव, आदित्य सोनकर, सूरज साहू, देवाशीष सरकार और लिपिका सरकार ने घाट पर उपस्थित सभी नृत्य कला प्रेमियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व अभिनंदन व्यक्त किया।