UP Assembly Election: नीतीश के बेटे निशांत बनारस से करेंगे जेडीयू का चुनावी शंखनाद, यूपी में 60 सीटों पर तैयारी
25 अक्टूबर को बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी आ रहे हैं निशांत कुमार; पूर्वांचल की कुर्मी-कुशवाहा बहुल सीटों पर जेडीयू की नजर
वाराणसी / पटना / डिजिटल डेस्क (भदैनी मिरर): बिहार में राजनीतिक पैठ मजबूत करने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) अब उत्तर प्रदेश के चुनावी मैदान में उतरने की रणनीति को धार देने में जुट गई है। जेडीयू ने आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की कमान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के हाथों में सौंपी है। निशांत 25 अक्टूबर को बाबा विश्वनाथ की पावन धरा वाराणसी (बनारस) से उत्तर प्रदेश में जेडीयू के चुनावी अभियान का औपचारिक शंखनाद करेंगे।

बिहार के बाहर निशांत का यह पहला बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम माना जा रहा है, जिसको लेकर पार्टी के प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं और नेताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
संजय झा समेत शीर्ष नेतृत्व रहेगा मौजूद
जेडीयू सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, 25 अक्टूबर को बनारस में आयोजित होने वाले इस विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में निशांत कुमार पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे। इस दौरान जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा सहित कई अन्य वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के उपस्थित रहने की संभावना है।

60 सीटों पर जेडीयू का फोकस, पूर्वांचल की कुर्मी-कुशवाहा बेल्ट पर नजर
जेडीयू इस बार उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से लगभग 60 सीटों पर पूरी मजबूती के साथ उतरने की तैयारी कर रही है।
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पूर्वांचल पर खास नजर: पार्टी का मुख्य ध्यान पूर्वांचल के उन क्षेत्रों पर है जहां कुर्मी और कुशवाहा (पटेल व मौर्य/शाक्य) मतदाताओं की संख्या प्रभावी भूमिका में है।
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संगठन का विस्तार: जेडीयू का मानना है कि बिहार से सटे होने के कारण पूर्वांचल में पार्टी का सामाजिक समीकरण (Social Engineering) काफी मजबूत साबित हो सकता है।
बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने की तैयारी
साल 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में जेडीयू, एनडीए (NDA) के घटक दल के रूप में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर विचार कर रही है। जेडीयू के यूपी प्रदेश अध्यक्ष अनूप पटेल के अनुसार, सीटों के तालमेल और गठबंधन का अंतिम निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत कर तय करेगा। हालांकि, प्रदेश संगठन हर स्थिति में चुनाव के लिए तैयार है।

2022 के नतीजों से सबक लेकर नई रणनीति
गौरतलब है कि साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी जेडीयू और बीजेपी के बीच गठबंधन की वार्ता तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह के माध्यम से चली थी, लेकिन बात नहीं बन सकी थी।
इसके बाद जेडीयू ने अकेले 27 सीटों पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था और किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो सकी थी, जबकि 26 सीटों पर प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। इस बार जेडीयू अपनी पिछली गलतियों से सबक लेते हुए एनडीए गठबंधन के तहत पूर्वांचल में अपनी पकड़ मजबूत करने के इरादे से मैदान में उतर रही है।
