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वाराणसी में सम्पन्न हुई ‘उन्मेष’ प्रज्ञा प्रवाह युवा आयाम काशी प्रांत की प्रांतीय टोली बैठक

बैठक का मुख्य विषय रहा – “कार्यकर्ता निर्माण: आत्मचिंतन से आत्मबल तक”

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युवाओं से ‘विमर्श परिवर्तन’ और ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की दिशा में सक्रिय होने का आह्वान

सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव और युवाओं की जिम्मेदारी पर केंद्रीय टोली सदस्य रामाशीष जी ने रखे विचार


 

वाराणसी। "उन्मेष" प्रज्ञा प्रवाह 'युवा आयाम' काशी प्रांत की प्रांतीय टोली बैठक वाराणसी महानगर स्थित उदय प्रताप इंटरमीडिएट कॉलेज के कॉन्फ्रेंस हॉल में सम्पन्न हुई। बैठक का मुख्य विषय रहा – “कार्यकर्ता निर्माण: आत्मचिंतन से आत्मबल तक”।

बैठक में प्रमुख रूप से प्रज्ञा प्रवाह की केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य रामाशीष जी और पूर्वी एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संयोजक भगवती प्रसाद 'राघव' जी उपस्थित रहे।

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प्रांत संयोजक डॉ. कुँवर शेखर गुप्त ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए पिछले वर्ष हुए कार्यों का विवरण और आगामी वर्ष की कार्ययोजना प्रस्तुत की।
क्षेत्र संयोजक भगवती प्रसाद 'राघव' ने युवाओं को ‘युवा आयाम’ की भूमिका समझाते हुए कहा कि संगठन का उद्देश्य दो आयामों पर केंद्रित है –

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  1. विमर्श परिवर्तन: क्विक एक्शन ग्रुप बनाकर सामाजिक घटनाओं पर सकारात्मक विमर्श खड़ा करना।
  2. व्यवस्था परिवर्तन: समाज में अच्छा कार्य करने वालों को पहचानकर संगठन से जोड़ना और प्रज्ञा प्रवाह का दृष्टिपत्र सब तक पहुँचाना।

समापन सत्र में रामाशीष ने कहा कि भारत युवाओं का देश है, लेकिन कुछ युवा दिग्भ्रमित भी हैं जिन्हें भारत माता की जय कहने में परहेज़ है। ऐसे युवाओं का “डिटॉक्सिफिकेशन” जरूरी है।
उन्होंने सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए कहा – "आज फेसबुक का व्यवहार फेसमास्क की तरह हो गया है।"
युवाओं से उन्होंने आह्वान किया कि वे यह सोचने के बजाय कि संगठन से क्या मिला, इस पर विचार करें कि हमने समाज और संगठन को क्या दिया।

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प्रांत सह संयोजक संतोष त्रिपाठी ने युवाओं को अध्ययनशीलता विकसित करने और संगठन कार्य को समय देने पर बल दिया। बैठक का संचालन महानगर संयोजक डॉ. विशाल सिंह ने किया। इसमें 57 युवाओं समेत विंध्याचल मंडल, काशी विद्यापीठ, उदय प्रताप महाविद्यालय एवं अन्य राष्ट्रीय विचार से जुड़े विद्वान और युवा उपस्थित रहे।