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पांडेपुर चौराहा पर अनोखी होलिका दहन थीम: ‘मुरारी चाय वाले और खाई के पान बनारस वाला’ ने खींचा सबका ध्यान

बनारसी चाय-पान संस्कृति की झलक के साथ सजा होलिका दहन स्थल, दो महीने की तैयारी के बाद समिति ने दिया लोक परंपरा को नया मंच

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रिपोर्ट - वीरेंद्र पटेल

वाराणसी, भदैनी मिरर। काशी में होली का उल्लास अपने चरम पर है और शहर के प्रमुख चौराहों पर होलिका दहन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इसी क्रम में पांडेपुर चौराहा एक बार फिर अपनी अनोखी थीम को लेकर चर्चा में है। इस वर्ष यहां होलिका दहन स्थल को ‘मुरारी चाय वाले और खाई के पान बनारस वाला’ थीम पर सजाया गया है, जिसने स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीरों का भी ध्यान आकर्षित किया है।

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आयोजन समिति ने बनारसी संस्कृति को केंद्र में रखते हुए पान की दुकान की आकर्षक प्रतिकृति तैयार की है। पारंपरिक अंदाज में सजी यह प्रतिकृति बनारस की प्रसिद्ध चाय और पान संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रही है। रंग-बिरंगी लाइटिंग, देसी सजावट और स्थानीय बोलचाल की झलक इस थीम को खास बना रही है।

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समिति के सदस्यों के अनुसार, हर वर्ष की तरह इस बार भी होलिका दहन की तैयारी करीब दो महीने पहले शुरू कर दी गई थी। एक विशेष बैठक में इस साल की थीम पर चर्चा के बाद ‘बनारसी चाय-पान’ को केंद्र में रखने का निर्णय लिया गया। इसके बाद कलाकारों और कारीगरों की मदद से थीम को भव्य रूप दिया गया।

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स्थानीय निवासियों का कहना है कि पांडेपुर चौराहा की होलिका दहन सजावट हर साल कुछ नया संदेश देती है। इस बार की थीम जहां एक ओर धार्मिक आस्था को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर काशी की लोक संस्कृति और पारंपरिक पहचान को भी सामने लाती है।

होलिका दहन केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। पांडेपुर चौराहा की यह पहल दर्शाती है कि वाराणसी में त्योहारों को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि रचनात्मकता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के रूप में भी मनाया जाता है।

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इन दिनों पांडेपुर क्षेत्र में लोगों की आवाजाही बढ़ गई है। परिवार और युवा वर्ग विशेष रूप से इस अनोखी सजावट को देखने पहुंच रहे हैं। होलिका दहन की इस थीम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि काशी का हर उत्सव अपने आप में अलग और यादगार होता है।

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