काशी आ रहा है दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज 'MV Ganga Vilas', जानें रूट, किराया और इसकी लग्जरी खूबियां
कोलकाता से वाराणसी तक 18 दिनों का सफर; बक्सर, पटना और गाजीपुर होते हुए काशी में डालेगा डेरा
वाराणसी (भदैनी मिरर): भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आधुनिकता और आत्मनिर्भरता का बेजोड़ प्रतीक बन चुका लग्जरी रिवर क्रूज 'एमवी गंगा विलास' (MV Ganga Vilas) एक बार फिर काशी के घाटों की शोभा बढ़ाने आ रहा है। यह क्रूज आगामी अक्टूबर के पहले सप्ताह में 32 विदेशी सैलानियों को लेकर कोलकाता से वाराणसी पहुंचेगा। इस सफर को लेकर विदेशी मेहमानों में इस कदर उत्साह है कि क्रूज की सभी सीटें और आलीशान सुइट्स महीनों पहले ही फुल हो चुके हैं।


भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने इस शाही यात्रा के रूट को हरी झंडी दे दी है। अंतरा क्रूज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राज सिंह के मुताबिक, क्रूज सितंबर के अंत में कोलकाता से अपनी यात्रा की शुरुआत करेगा।
18 दिनों का रोमांचक सफर और लाखों में किराया
राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा नदी) पर करीब 18 दिनों की इस ऐतिहासिक और रोमांचक यात्रा के दौरान क्रूज बक्सर, पटना और गाजीपुर जैसे प्रमुख नदी बंदरगाहों पर ठहरते हुए वाराणसी पहुंचेगा।

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किराया और खर्च: इस क्रूज में एक सुइट की बुकिंग कीमत ₹18 लाख तय की गई है। कई यात्रियों ने मिलकर इन सुइट्स को बुक किया है, जिससे प्रति यात्री एक दिन का औसतन खर्च लगभग ₹50,000 आ रहा है।
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काशी में तीन दिन का ठहराव: अक्टूबर में गंगा का जलस्तर पर्याप्त रहने के कारण इसके संचालन में कोई बाधा नहीं आएगी। क्रूज वाराणसी में तीन दिनों तक रुकेगा, जहां स्विट्जरलैंड, जर्मनी और अमेरिका के पर्यटक काशी की संस्कृति और गंगा आरती का दीदार करेंगे। इसके बाद यहीं से 30 नए पर्यटक कोलकाता की वापसी यात्रा पर सवार होंगे।
क्रूज के अंदर तैरता हुआ 'लग्जरी महल'
करीब 62.5 मीटर लंबे और 12.8 मीटर चौड़े इस क्रूज का इंटीरियर बेहद खास है। इसे 1960 के दशक के भारत की थीम पर डिजाइन किया गया है। इसके फर्नीचर, क्रॉकरी और कमरों में सफेद, गुलाबी, लाल रंगों के साथ वुडेन फ्लोरिंग का शानदार तालमेल है। क्रूज में:
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17 आलीशान लग्जरी सुइट्स
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40 सीटों की क्षमता वाला भव्य रेस्टोरेंट
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स्पा रूम और तीन बड़े सनडेक (Sundeck)
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चालक दल (क्रू) समेत 80 लोगों के रहने की उत्तम व्यवस्था है।
पूरी तरह से इको-फ्रेंडली (Eco-Friendly) तकनीक
गंगा की निर्मलता और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस क्रूज को 'जीरो कार्बन फुटप्रिंट' की तर्ज पर तैयार किया गया है। नदी में प्रदूषण रोकने के लिए इसमें हाई-स्पीड डीजल का उपयोग होता है। साथ ही विशेष 'ऑयल स्प्रेडर्स' तकनीक लगाई गई है, जिससे डीजल की एक बूंद भी नदी के पानी में मिक्स नहीं हो सकती। क्रूज के सॉलिड और लिक्विड वेस्ट (कचरे) को पानी में बहाने के बजाय उसे सुरक्षित स्टोर किया जाता है और जमीन पर लाकर उसका निस्तारण होता है।

क्रूज की तकनीकी क्षमता और रफ्तार
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ईंधन क्षमता: 40,000 लीटर (प्रतिदिन 1000 लीटर की खपत के साथ यह लगातार 40 दिनों तक चल सकता है)।
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पानी का स्टोरेज: 60,000 लीटर।
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गति: गंगा की धारा के विपरीत (Upstream) दिशा में इसकी रफ्तार 10 से 15 किमी प्रति घंटा रहती है, जबकि धारा के अनुकूल (Downstream) चलने पर यह गति दोगुनी यानी 20 से 30 किमी प्रति घंटा तक हो जाती है।
जलस्तर बढ़ने का इंतजार: गाजीपुर में फंसा मालवाहक जहाज
फिलहाल मानसून के इस दौर में गंगा में जलस्तर के उतार-चढ़ाव के कारण जल परिवहन थोड़ा प्रभावित है। यही वजह है कि कोलकाता से वाराणसी आ रहा एक मालवाहक जहाज बीते 22 दिनों से गाजीपुर में रुका हुआ है। हालांकि, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि अक्टूबर की शुरुआत तक नदी का जलस्तर पूरी तरह सामान्य और स्थिर हो जाएगा, जिससे गंगा विलास क्रूज और अन्य मालवाहक जहाजों की आवाजाही बेहद सुगम हो जाएगी।
