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वाराणसी में 4 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा गंगा का जलस्तर, जिला प्रशासन ने 61 राहत शिविर और 21 चौकियां कीं अलर्ट

राजघाट गेज पर जलस्तर 69.52 मीटर तक पहुंचा; शवदाह में हो सकती है परेशानी, NDRF-PAC समेत 198 नावें तैनात, 24 घंटे कंट्रोल रूम चालू।
 

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Varanasi
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वाराणसी (भदैनी मिरर): वाराणसी में गंगा नदी के जलस्तर में गिरावट के बाद एक बार फिर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। रविवार (30 अगस्त 2026) की रात 8 बजे केंद्रीय जल आयोग (CWC) के राजघाट स्थित गेज स्टेशन के आंकड़ों के अनुसार, गंगा का जलस्तर 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों का संपर्क टूटने लगा है और श्मशान घाटों पर शवदाह के लिए आने वाले लोगों की मुश्किलें फिर बढ़ सकती हैं।

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गंगा एवं वरुणा नदियों के संभावित उफान को देखते हुए वाराणसी जिला प्रशासन ने आमजन की सुरक्षा, राहत और बचाव कार्यों के लिए व्यापक बहुस्तरीय तैयारियां पूरी कर ली हैं।

30 अगस्त 2026 (रात 8:00 बजे) का जलस्तर अपडेट:

  • गेज स्थल: राजघाट, वाराणसी (केंद्रीय जल आयोग)
  • वर्तमान जलस्तर: 69.52 मीटर
  • ट्रेंड (रफ्तार): 4 सेमी/घंटा (बढ़ोतरी पर)
  • वार्निंग लेवल (चेतावनी स्तर): 70.262 मीटर
  • डेंजर लेवल (खतरा निशान): 71.262 मीटर
  • एचएफएल (अब तक का उच्चतम जलस्तर): 73.90 मीटर

प्रशासन की तैयारियां: 61 राहत शिविर और 21 बाढ़ चौकियां सक्रिय

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जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित और संभावित क्षेत्रों में त्वरित सहायता के लिए निम्नलिखित पुख्ता इंतजाम किए गए हैं:

  • 61 बाढ़ राहत शिविर: प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए 61 शिविर चिन्हित किए गए हैं। इन शिविरों में ठहरने, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता और कम्युनिटी किचन के जरिए प्रतिदिन तीन समय पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
  • 21 बाढ़ चौकियां: स्थानीय स्तर पर पल-पल की स्थिति पर नजर रखने के लिए 21 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं, जो सीधे नियंत्रण कक्ष से जुड़ी रहेंगी।
  • 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम: बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है, जहां से जलस्तर, मौसम और आपदा संबंधी सूचनाओं का त्वरित निस्तारण किया जाएगा।

NDRF, PAC, जल पुलिस और 198 नावें मुस्तैद

आपातकालीन रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए NDRF, PAC और जल पुलिस की विशेषज्ञ टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। इसके अलावा, निचले और प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन व राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 198 नावों की व्यवस्था की गई है।

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चिकित्सा विभाग द्वारा प्राथमिक उपचार और दवाओं की किट तैयार रखी गई है, जबकि नगर निगम को स्वच्छता और पेयजल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

पशुधन सुरक्षा पर विशेष ध्यान

मानव जीवन के साथ-साथ पशुओं की सुरक्षा के लिए पशुपालन विभाग ने पर्याप्त भूसे और चारे का प्रबंध किया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मवेशियों के मुफ्त टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और सुरक्षित आश्रय स्थल की व्यवस्था की गई है।


प्रशासन की अपील: न जाएं उफनाई नदियों की ओर

जिला प्रशासन ने काशीवासियों और पर्यटकों से अपील की है कि जलस्तर बढ़ने और जलभराव की स्थिति में नदियों, नालों या तेज बहाव वाले स्थानों की ओर न जाएं। किसी भी आपात स्थिति या जलभराव की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन या बाढ़ नियंत्रण कक्ष को दें।