Movie prime
PMC_Hospital

राम मंदिर विवाद का आध्यात्मिक पक्ष: IMS BHU के डॉ. सुनील कुमार का बड़ा दावा

'आध्यात्मिक गलती के आचार्यों को माना जाए मुख्य अभियुक्त'— आईएमएस बीएचयू के एसोसिएट प्रोफेसर ने उठाई मांग

Ad

 
dd
WhatsApp Group Join Now

Ad

वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IMS) स्थित कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रभु श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हाल ही में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं और चोरी के मामले पर एक बिल्कुल नया और आध्यात्मिक दृष्टिकोण (Spiritual Angle) प्रस्तुत किया है। डॉ. सुनील कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया है कि यह पूरा घटनाक्रम महज 'धन का फेर' नहीं, बल्कि 'मन के फेर' और गंभीर गुरुत्व संकट का परिणाम है। उनके अनुसार, इस प्रकार की आध्यात्मिक गलतियों के दोषियों को कानूनन अभियुक्त माना जाना चाहिए।

Ad
Ad

'मन' और 'संस्कार' की दिशा से उपजा वर्तमान संकट

डॉ. सुनील कुमार ने व्यक्ति की संरचना के तीन अवयवों—तन, मन और आत्मा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान संकट सीधे तौर पर 'मन' से जुड़ा है। मन जैसा निर्देश देता है, तन वैसा ही कार्य करता है। आत्मा की ऊर्जा परमात्मा से मिलती है, लेकिन मन को दिशा समाज के संस्कारों और गुरु से प्राप्त होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि संस्कारों के निर्माण में ही असुर ग्रहों का आवाहन और आहुति शामिल होगी, तो मानवीय प्रवृत्ति में असुरत्व का आना स्वाभाविक है।

Ad

प्राण प्रतिष्ठा के कर्मकांड और पूजा पद्धति पर उठाए सवाल

विज्ञप्ति के माध्यम से डॉ. कुमार ने दावा किया कि प्रभु श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा के कर्मकांड में राहु, केतु और शुक्राचार्य (असुर गुरु) के शामिल होने के कारण वहां से एक दोषपूर्ण ऊर्जा निकल रही है। निरंतर पूजन होने से इस ऊर्जा में गुणात्मक वृद्धि हो रही है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव वहां काम करने वाले कर्मियों से लेकर दर्शन करने आ रहे श्रद्धालुओं पर भी पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि इस दोषपूर्ण पूजा पद्धति के आचार्यों को ही इस पूरी दुर्घटना का मुख्य अभियुक्त माना जाना चाहिए।

Ad

कलियुग में गुरुत्व दोष और महाभारत का प्रसंग

डॉ. सुनील कुमार ने पौराणिक संदर्भों का हवाला देते हुए कहा कि कलियुग में अष्ट चिरंजीवियों में महर्षि वेदव्यास को गुरु और ऋषियों में मार्कंडेय ऋषि को प्रधान माना गया है। ऐसे में द्रोणाचार्य को कलियुग में गुरु के रूप में स्वीकार करना एक बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि महाभारत युद्ध के समय स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने द्रोणाचार्य को गुरु और पिता, दोनों रूपों में विफल बताया था क्योंकि वे अधर्म के पक्ष में लड़े थे। वैष्णव संप्रदाय के जिम्मेदार पदाधिकारियों के कारण ही आज समाज में यह गुरुत्व और दिशा दोष व्याप्त है।

कल्कि भगवान की चेतना जागृत, भविष्य में गंभीर संकट की चेतावनी

प्रोफेसर ने अपनी प्रेस वार्ता में आगाह किया कि वर्तमान समय में 'कल्कि भगवान' की आध्यात्मिक चेतना जागृत हो चुकी है। सनातनियों के पास निर्णय लेने के लिए बहुत कम समय बचा है। आगामी महीनों में भारी आध्यात्मिक और प्राकृतिक उथल-पुथल की आशंका है। ज्योतिषीय विश्लेषणों में असुर ग्रहों को प्रधानता दिए जाने के कारण ही आज समाज में शांति के स्थान पर क्लेश, कलह, युद्ध और प्राकृतिक आपदाएं देखने को मिल रही हैं।