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12 साल से अधूरी सड़क, न मुआवजा मिला न न्याय: NH-233 के किसानों का फूटा गुस्सा

वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग पर कृषि योग्य जमीन बताकर दिया जा रहा कम मुआवजा; किसानों की चेतावनी— 'सड़क नहीं तो टोल नहीं', मांगे न मानी गईं तो वहीं देंगे जान।

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भदैनी मिरर डेस्क: राष्ट्रीय राजमार्ग-233 (वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग) के निर्माण और भूमि अधिग्रहण को लेकर पूर्वांचल के किसानों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। पिछले 12 वर्षों से 16 किलोमीटर लंबी सड़क अधूरी पड़ी है, लेकिन इसके बावजूद वाराणसी सीमा पर स्थित ढेहरी टोल प्लाजा पर टोल टैक्स की वसूली बदस्तूर जारी है।

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अधूरी सड़क, जमीनों का गलत मूल्यांकन (कम मुआवजा) और लंबित ब्याज को लेकर आक्रोशित किसानों ने जिला प्रशासन और NHAI के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। किसानों ने ऐलान किया है कि 30 सितंबर को पूर्वांचल के किसान ढेहरी टोल प्लाजा पर एकत्रित होकर विशाल धरना-प्रदर्शन और अनशन करेंगे।

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'मार्केट रेट की कमर्शियल जमीन को दिखाया कृषि योग्य'

पूर्वांचल किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जौनपुर (केराकत) निवासी सूर्यनाथ सिंह ने अधिकारियों और NHAI पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि वर्ष 2012-13 में ही उनकी जमीनों का अधिग्रहण कर लिया गया था, लेकिन आज तक उचित मुआवजा नहीं मिला।

किसान नेताओं का आरोप है कि:

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  • गलत मूल्यांकन: जिस जमीन पर ऊपर बैंक (जैसे गोमती ग्रामीण बैंक ऑफ बड़ौदा) और दुकानें चल रही हैं, उसे अधिकारियों ने फाइलों में 'कृषि योग्य जमीन' दर्ज कर दिया है ताकि मुआवजा कम देना पड़े।

  • इमारतों का कम मूल्यांकन: 2-3 साल पहले बनी कमर्शियल इमारतों को 40 साल पुरानी और जर्जर दिखाकर 50 प्रतिशत तक मुआवजा काटा जा रहा है।

  • टोल प्लाजा का गलत स्थान: किसानों का कहना है कि यह टोल प्लाजा वाराणसी की जगह जौनपुर सीमा (चंद्रप्रभा पुल के पास) बनना चाहिए था, लेकिन नियमों को दरकिनार कर जबरन यहां स्थापित कर टोल वसूला जा रहा है।

'सड़क नहीं तो टोल नहीं', 2200 किसान प्रभावित

किसानों का स्पष्ट कहना है कि एनएच-233 का 16 किलोमीटर का हिस्सा लंबे समय से अधूरा है। जब 20 किमी के दायरे में सड़क बनी ही नहीं है, तो जनता से टोल टैक्स वसूलना पूरी तरह से गैर-कानूनी और अन्यायपूर्ण है।

किसानों ने बताया कि लगभग 2200 किसान परिवार इस भूमि अधिग्रहण से प्रभावित हैं। कई बुजुर्ग किसान तो अपने हक का मुआवजा और वैधानिक ब्याज का इंतजार करते-करते दुनिया से चले गए।

30 सितंबर को टोल पर ही 'मर मिटने' की चेतावनी

सपा व किसान संगठनों से जुड़े नेताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने वाराणसी के जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर और NHAI को ज्ञापन सौंपकर निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

  1. लंबित मुआवजा व ब्याज: अधिग्रहित भूमि का हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत बाज़ार दर पर उचित मुआवजा और वर्षों का लंबित ब्याज तत्काल दिया जाए।

  2. टोल प्लाजा हो बंद: जब तक एनएच-233 का 16 किमी का निर्माण कार्य पूरा नहीं होता, ढेहरी टोल प्लाजा पर टोल वसूली तुरंत रोकी जाए।

  3. पारदर्शी जांच: इमारतों और कमर्शियल जमीनों को कृषि योग्य दिखाने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

किसान नेता सूर्यनाथ सिंह ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है:

"हम 30 सितंबर को अपनी दवा-दारू लेकर ढेहरी टोल प्लाजा पहुंचेंगे। अगर हमारे हक में निर्णय नहीं हुआ और टोल बंद नहीं कराया गया, तो हम वहीं अनशन पर बैठकर अपनी जान दे देंगे। जिन किसानों की मौत इस अन्याय के कारण हुई है, उनकी प्रतिमाएं इसी एनएचआई के गिट्टी-बालू से वहीं बनाएंगे।"