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बाबा विश्वनाथ संग माता गौरा की विदाई में खूब झूमे काशीवासी, हुए अबीर-गुलाल से सराबोर, देखता रहा गया प्रशासन

प्रशासन के महज 64 लोगों के मंदिर में प्रवेश की अनुमति से भक्तों में दिखी नाराजगी

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काशी की पुरातन परम्परा का सालभर से रहता है भक्तों को इंतजार

वाराणसी, भदैनी मिरर। काशी विश्वनाथ धाम प्रशासन या यह कह लिजिए कि जिला प्रशासन के तमाम प्रतिबंधों के बावजूद काशी की असली और पुरातन परम्परा रंगभरी एकादशी की शाम अनूठे रंगोत्सव की साक्षी बनी। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम प्रशासन के तमाम प्रतिबंधों और फरमान जारी करने के बावजूद काशीवासियों ने बाबा विश्वनाथ के साथ होली खेलने की परम्परा के साथ अपने को जोड़े रखा। हजारों की संख्या में बाबा के भक्त उमड़ पड़े। माता गौरा की विदाई के वक्त की खुशी में काशीवासी इतने सराबोर हो गये कि पूरा इलाका हर-हर महादेव और माता पार्वती के जयघोष से गूंज उठा। तमाम प्रशासनिक तामझाम धरे के धरे  रह गये और आस्था भारी पड़ गई। 

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गौरतलब है कि सैकड़ों साल से माता गौरा की विदाई और बाबा विश्वनाथ का पालकी संग माता को लेकर मंदिर में विदाई के इस अद्भुत क्षण को काशीवासी कभी भूल नही सकते। इस क्षण का हर साल काशीवासियों को इंतजार रहता है और बाबा-माता गौरा के साथ अबीर-गुलाल की होली खेलने के बाद ही काशीवासी होली खेलने की अनुमति लेते है। इसी के साथ काशी में होली की विधिवत शुरूआत हो जाती है। लेकिन मंदिर के अधिग्रहण के बाद से ही इस पुरातन परम्परा पर प्रशासनिक या यह कह लिजिए की शासन स्तर से इसमें विघ्न डालने के हर सम्भव प्रयास होते रहे जो आज भी जारी हैं। सालों पुरानी परम्परा के नाम पर मसाने की होली की प्रशासन अनुमति दे देता है जो कभी परम्परा थी ही नही। लेकिन बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती के गवने के समय की पुरातन परम्परा जानते हुए भी विघ्न का प्रयास होता है। इसका ताजा उदाहरण है कि रंगभरी एकादशी को मंदिर में प्रवेश के लिए महज 64 लोगों को प्रवेश की अनुमति मिली। बाबा के मंदिर के सरकारी अधिग्रहण के बाद अब नौकरशाही का फरमान लागू हो रहा हैं और काशी की पुरातन परम्परा पर चोट पहुंचाई जा रही है। फिलहाल बाबा प्रशासनिक आदेशों की बाबा के भक्तों ने धज्जियां उड़ा दी। सबकुछ के बावजूद बहुत बड़ी संख्या में भक्त बाबा के उत्सव में शामिल हुए। यहां तक कि महिलाएं और बच्चे इससे अछूते नही रहे। डमरू की नाद और हर-हर महादेव के जयघोष के साथ बाबा विश्वनाथ शुक्रवार की शाम माता गौरा का गौना कराकर विश्वनाथ धाम लौटे। काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत स्वर्गीय डॉ. कुलपति तिवारी के टेढ़ीनीम स्थित आवास से तय समय पर बाबा की पालकी उठी।

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इस दौरान बाबा की एक झलक पाने को भक्तों ललायित दिखे, चारों ओर हर-हर महादेव का जयघोष हो रहा था। शिवभक्त बाबा की अगवानी में काशी की गलियों में गुलाल की होली खेली। इसी के साथ भोले की नगरी में होली उत्सव की शुरुआत हो गयी। टेढ़ीनीम स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत के आवास पर माता के विदाई के तैयारियों के साथ ब्रह्म मुहूर्त में बाबा के साथ माता गौरा की चल पंचबदन रजत प्रतिमा का पंचगव्य और पंचामृत स्नान के बाद दुग्धाभिषेक किया गया। सुबह पांच से साढ़े आठ बजे तक 11 वैदिक ब्रह्मणों ने षोडशोपचार पूजन के बाद फलाहार का भोग लगाकर महाआरती की। फिर चल प्रतिमाओं का राजसी श्रृंगार एवं पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे भोग आरती के बाद के बाबा का दर्शन शुरू हो गया। इसके बाद गौरी-शंकर और पुत्र गजानन श्रीगणेश को गुलाल लगाकर होली के उत्सव का विधिवत शुभारम्भ हुआ। बाबा को राजशाही पगड़ी, देवी पार्वती के महारानी मुकुट पहनाया गया। बाबा की प्राचीन पालकी की विशेष पूजा मंहत परिवार के प्रतिनिधि पं. वाचस्पति तिवारी ने की। चल प्रतिमाओं के दर्शन के लिए काफी संख्या में काशीवासी और विशिष्टजन पहुंचे।

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शाम को पालकी उठने के समय तक दर्शनार्थियों को रेला लगा रहा। डमरुओं की निनाद और राजसी ठाट में बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ माता गौरा के साथ पालकी पर सवार हुए। माता गौरा की गोद में गणेशजी विराजमान रहे। महंत आवास के बाहर मुख्य गली से मंदिर के मुख्यद्वार के बीच पालकी पर अबीर और गुलाल की वर्षा होने लगी। शाम पांच बजे जैसे ही मंदिर से अर्चकों का दल महंत आवास की गली में पहुंचा। समूचा वातावरण हरहर महादेव के घोष से गुंजायमान हो उठा। कर्पूर की आरती के बाद बाबा की पालकी उठाई गई। चारों तरफ से अबीर और गुलाब की पंखुड़ियां उड़ाई जाने लगीं। शंख बजने लगे और डमरूओं की निनाद के बीच बाबा की पालकी विश्वनाथ मंदिर की ओर बढ़ी। महंत आवास से साक्षी विनायक तक पहुंचते तक हर भक्त अबीर और गुलाल से शराबोर हो चुका था। इसके बाद साक्षीविनायक और ढुंढिराज गणेश मंदिर होते हए बाबा की पालकी श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश कर गई। इससे पूर्व महंत आवास पर पारंपरिक शिवांजलि का सांकेतिक आयोजन किया गया। रुद्रनाद बैंड के टाइल सांग ‘पार्वती संग सदा शिव खेल रहे होली, भूत, प्रेत बैताल करते ठिठोली...’ से बैंड के लीर्ड ंसगर अमित त्रिवेदी ने किया। राग नट भैरव में निबद्ध उनकी रचना योगी ने माहौल को योगेश्वर शिव की अनुभूतियों से भर दिया। गायक पुनीत जेटली पागल बाबा,प्रभु सिंह दाढ़ी, अदिति शर्मा, जौनपुर के सौरभ शुक्ला,सरोज वर्मा, संजय दुबे ने भजन गंगा बहाई। इसके साथ बाबा की इस विशाल शोभायात्रा में काशी विश्वनाथ धाम प्रशासन को भक्तों को मंदिर प्रवेश की सीमा तय करने पर गहरी नाराजगी दिखी। यह नाराजगी स्थानीय प्रशासन और वर्तमान सरकार के प्रति थी।

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