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काशी: विद्या मठ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बयान, “जांच में शिकायतकर्ता की भूमिका पर उठे सवाल”

केदारघाट स्थित विद्या मठ में प्रेस वार्ता; व्हाट्सएप ग्रुप और विवेचना प्रक्रिया को लेकर कही बड़ी बातें

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वाराणसी,भदैनी मिरर। काशी के केदारघाट स्थित विद्या मठ में बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने चल रही जांच प्रक्रिया और उससे जुड़े विवादों पर विस्तार से अपनी बात रखी।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिस प्रकरण की विवेचना चल रही है, उसमें शिकायतकर्ता की सक्रिय मौजूदगी और मीडिया में जारी सूचनाओं की प्रकृति पर सवाल खड़े होते हैं। उनका कहना था कि सामान्यतः जांच प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से होती है, ऐसे में शिकायतकर्ता की निरंतर उपस्थिति पर पारदर्शिता को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है।

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व्हाट्सएप ग्रुप के स्क्रीनशॉट का जिक्र

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने एक व्हाट्सएप ग्रुप के कथित स्क्रीनशॉट का उल्लेख किया, जिसका नाम “न्याय यात्रा” बताया गया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इस ग्रुप में कई पत्रकार जुड़े हैं और विवेचना से संबंधित सूचनाएं साझा की जा रही हैं।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि जांच टीम के साथ शिकायतकर्ता स्वयं मौजूद रहकर साक्ष्य संकलन में सहयोग कर रहा है, तो यह प्रक्रिया किस सीमा तक विधिसम्मत है।

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पूर्व सरकारों के दौरान आंदोलनों का हवाला

पत्रकारों के सवालों के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में किए गए आंदोलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मंदिर, गंगा संरक्षण और अन्य धार्मिक मुद्दों पर उन्होंने अलग-अलग सरकारों के समय अपनी आवाज उठाई और कई मामलों में कार्रवाई भी हुई।

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उन्होंने दावा किया कि धर्म से जुड़े विषयों पर उनकी आवाज को पूर्व में सुना गया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में उन्हें अपनी बात रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

मानहानि और कानूनी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया

मानहानि के संभावित मुकदमे को लेकर पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यदि लगाए गए आरोप असत्य सिद्ध होते हैं तो विधिक कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले में कानून की प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। उनका मत था कि न्यायालयीन प्रक्रिया से इतर कोई भी कदम भविष्य में न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा कर सकता है।

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मठ से जुड़े व्यक्तियों पर लगाए जा रहे आरोपों को वे निराधार मानते हैं और इसका खंडन करते हैं।