सुभासपा का वाराणसी में जोरदार प्रदर्शन: सपा सांसद पर जातिसूचक बयान का आरोप, डीएम को सौंपा ज्ञापन
घोसी सांसद के खिलाफ सुभासपा कार्यकर्ताओं ने खोला मोर्चा, दिल्ली जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन में विपक्ष द्वारा माहौल बिगाड़ने का भी लगाया आरोप।
वाराणसी (भदैनी मिरर)। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की जिला इकाई द्वारा गुरुवार को वाराणसी जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में घोसी से सपा सांसद और उनके समर्थकों पर पिछड़ा, अतिपिछड़ा और दलित समाज के खिलाफ जातिसूचक व अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाते हुए कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।


'पीडीए का नारा देकर दलित-पिछड़ों को दे रहे गाली'
वाराणसी में मंत्री प्रतिनिधि रमेश राजभर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि घोसी से समाजवादी पार्टी के सांसद राजू राय और उनके पूर्व जिलाध्यक्ष एक तरफ तो पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा देते हैं, वहीं दूसरी तरफ मंचों से पिछड़ों और दलितों के लिए अभद्र और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

रमेश राजभर ने कहा, "सपा के लोग पीडीए के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और उन्हीं के लोगों को जातिसूचक शब्दों से अपमानित कर रहे हैं। हम मुख्यमंत्री जी से मांग करते हैं कि ऐसे लोगों के खिलाफ जांच बैठाकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, अन्यथा वे समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।"

जंतर-मंतर छात्र आंदोलन: विपक्ष पर लगाया माहौल बिगाड़ने का आरोप
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और नीट (NEET) मुद्दे पर बोलते हुए सुभासपा के वाराणसी जिलाध्यक्ष उमेश राजभर ने कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह से छात्रों के हक और अधिकार के साथ खड़ी है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि शांत पूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच विपक्ष के लोगों ने घुसकर दंगा भड़काने और माहौल बिगाड़ने का काम किया।
उमेश राजभर ने कहा, "छात्र बहुत ही शालीनता से अपनी मांग रख रहे थे और सरकार भी उनके विषय में विचार कर रही थी। लेकिन 20 तारीख को जिस दिन फैसला होना था, उसी दिन समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और चंद्रशेखर जी जैसे विपक्षी नेता राजनीतिक रोटी सेकने के लिए वहां पहुंच गए। सादे लिबास में पहुंचे उपद्रवियों ने दंगा भड़काया, जिसके बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।"
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर सुभासपा का रुख
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सुभासपा नेताओं ने स्पष्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान जनता द्वारा चुनकर आए हैं और वे एक संवैधानिक पद पर हैं। ऐसे में विपक्ष या किसी के कहने मात्र से इस्तीफा नहीं होता। यह कैबिनेट और एनडीए गठबंधन का आंतरिक निर्णय है। हालांकि, सुभासपा ने छात्रों की जायज मांगों का पूरा समर्थन किया।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
सुभासपा द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वंचित और कमजोर वर्गों का अपमान करने वाली ऐसी भाषा संविधान की मूल भावना और सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर चुनौती है। पार्टी ने पूरे प्रदेश के 75 जिलों में इसी प्रकार का ज्ञापन देकर दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।


