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बीएचयू में भगत सिंह की 118वीं जयंती पर छात्रों ने निकाली रैली, उठाए आज़ादी और सामाजिक न्याय के सवाल

भगत सिंह स्टूडेंट्स मोर्चा (BSM) ने विश्वनाथ मंदिर से डफली की थाप पर क्रांतिकारी गीतों के साथ निकाली रैली

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Bhagat Singh Chatr Morcha
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महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण और सांप्रदायिकता पर BSM का तीखा हमला 

मुकम्मल आज़ादी और समाजवादी भारत की स्थापना की मांग

वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) परिसर में बुधवार को भगत सिंह की 118वीं जयंती के अवसर पर भगत सिंह स्टूडेंट्स मोर्चा (BSM) से जुड़े छात्रों ने विश्वनाथ मंदिर से रैली निकाली। डफली बजाते और क्रांतिकारी गीत गाते हुए छात्र-छात्राओं ने परिसर को भगत सिंह के नारों से गूंजा दिया।

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छात्रों ने कहा कि आज़ादी का मतलब केवल सत्ता का अंग्रेजों से भारतीय शासक वर्ग के हाथों में जाना नहीं था। भगत सिंह का सपना एक समाजवादी भारत का था—जहाँ मजदूरों-किसानों को उनका अधिकार मिले, धर्म और जाति के नाम पर समाज न बंटे और हर इंसान को बराबरी से जीने का हक मिले।

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BSM कार्यकर्ताओं ने पैम्पलेट के जरिए सवाल उठाए कि 140 करोड़ की आबादी में कितने लोग सच में आज़ाद हैं? आज भी देश में महंगाई और बेरोजगारी आम जनता को तोड़ रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य महंगे होते जा रहे हैं। मेडिकल और शिक्षा संस्थानों का निजीकरण गरीब छात्रों को बाहर कर रहा है।
सांप्रदायिकता और जातिवाद से समाज को बांटा जा रहा है और 80 करोड़ लोग सरकारी राशन पर जीने को मजबूर हैं।

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छात्रों का आरोप था कि सरकार जनता की असली समस्याओं को छुपाने के लिए धार्मिक मुद्दों को उभार रही है, जबकि पूंजीपति वर्ग को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
 

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