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 ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ अभियान का काशी से आगाज, बोले- दुर्भाग्यपूर्ण है गौमाता की रक्षा के लिए करना पड़ रहा आंदोलन 

500 अनुयायियों के साथ ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती काशी से लखनऊ रवाना; 11 मार्च को लखनऊ में संतों की बड़ी सभा

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वाराणसी। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार सुबह काशी से ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ अभियान की शुरुआत की। उन्होंने काशी स्थित श्रीविद्यामठ से शंखनाद कर इस अभियान का शुभारंभ किया और गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर लखनऊ के लिए प्रस्थान किया।

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शंकराचार्य के साथ लगभग 500 अनुयायी और 20 से अधिक वाहन इस यात्रा में शामिल हुए। यह यात्रा काशी से निकलकर जौनपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई और सीतापुर होते हुए पांच दिन बाद लखनऊ पहुंचेगी, जहां 11 मार्च को हजारों संतों की मौजूदगी में ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध सभा’ आयोजित की जाएगी।

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चिंतामणि गणेश और संकट मोचन में किया पूजन

अभियान की शुरुआत से पहले शंकराचार्य ने सुबह श्रीविद्यामठ से निकलकर गौशाला में गौमाता की पूजा की। इसके बाद वे पालकी पर सवार होकर चिंतामणि गणेश मंदिर पहुंचे, जहां 11 बटुकों ने उनका स्वागत किया।
मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना करने के बाद वे संकट मोचन हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक और बजरंगबाण का पाठ किया और गोरक्षक भगवान हनुमान से अपने अभियान की सफलता के लिए आशीर्वाद मांगा।

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‘धर्मयुद्ध के लिए निकलना पड़ रहा, यह दुर्भाग्य’

लखनऊ रवाना होने से पहले शंकराचार्य ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि उन्हें अपने ही देश में धर्म और गौमाता की प्रतिष्ठा के लिए धर्मयुद्ध का मार्ग अपनाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनी हुई सरकार के सामने गौमाता की रक्षा और सम्मान के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना है।

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सांसद और विधायकों से मांगा जाएगा जवाब

शंकराचार्य ने कहा कि यह अभियान जिस-जिस जिले से होकर गुजरेगा, वहां के सांसद और विधायकों से स्पष्ट जवाब मांगा जाएगा कि वे गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के पक्ष में हैं या विरोध में।
उन्होंने दावा किया कि समाज के सभी वर्ग—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र—गौमाता की रक्षा चाहते हैं और बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं।

40 दिन का दिया था अल्टीमेटम

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 30 जनवरी को उत्तर प्रदेश सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने मांग की थी कि गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित किया जाए, अन्यथा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
इसी अल्टीमेटम की अवधि पूरी होने के बाद अब उन्होंने ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ अभियान शुरू किया है।

समर्थकों में उत्साह, पोस्टर भी बांटे गए

अभियान के दौरान समर्थकों में काफी उत्साह देखा गया। यात्रा के दौरान लोगों को पोस्टर भी बांटे गए, जिन पर लिखा था— “जिंदा हिंदू लखनऊ चलें”।
पूजा-अर्चना और शंखनाद के बाद शंकराचार्य अपनी वैनिटी वैन में सवार होकर अनुयायियों के साथ लखनऊ के लिए रवाना हो गए।

 

 
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