वाराणसी में पप्पू यादव के बयान पर फूटा संतों का गुस्सा
वाराणसी ब्रेकिंग: सांसद पप्पू यादव के बयान पर भड़के संत, भगवा और सनातन के अपमान पर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
वाराणसी (भदैनी मिरर): पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा सनातन धर्म और भगवा वस्त्र को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद धार्मिक नगरी वाराणसी में संतों का गुस्सा फूट पड़ा है। काशी के धर्मगुरुओं और अखाड़ों ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कार्रवाई की मांग की है। संतों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सांसद सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो उनके खिलाफ देशव्यापी विरोध और आंदोलन शुरू किया जाएगा।


श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर ने दर्ज कराई कड़ी आपत्ति
राजघाट स्थित यमनेश्वर आश्रम में मीडिया से औपचारिक बातचीत के दौरान श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के पीठाधीश्वर और वरिष्ठ संतों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। संतों का कहना है कि आए दिन राजनीतिक लाभ के लिए सनातन परंपराओं, संतों और भगवा वस्त्र को निशाना बनाना एक चलन बनता जा रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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कड़ी कार्रवाई की मांग: संतों ने शासन-प्रशासन से पप्पू यादव समेत सनातन धर्म पर अमर्यादित टिप्पणी करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
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माफी न मांगने पर चेतावनी: धर्मगुरुओं ने कहा कि यदि उन्होंने अपने बयान पर जल्द क्षमा नहीं मांगी, तो संत समाज सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होगा।
"भगवान दर्शनीय हैं, प्रदर्शनीय नहीं" — राजनीतिक उपयोग पर जताई नाराजगी
संवाददाता सम्मेलन में संतों ने केवल बयानबाजी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक आयोजनों और रैलियों में भगवान के स्वरूपों का प्रदर्शन किए जाने पर भी गहरा असंतोष जताया।
संतों का स्पष्ट संदेश:
"हमारे आराध्य देव और भगवान सदैव 'दर्शनीय' (पूजा और आस्था के योग्य) हैं, वे किसी राजनीतिक मंच पर 'प्रदर्शनीय' (दिखावे की वस्तु) नहीं हैं। आस्था के प्रतीकों का राजनीतिक स्वार्थ के लिए उपयोग तुरंत बंद होना चाहिए।"
धर्म पर राजनीति करने वालों को दिया कड़ा संदेश
काशी के संत समाज ने राजनीतिक दलों और नेताओं को सचेत करते हुए कहा कि धर्म केवल आस्था का विषय है, इसे राजनीति का हथियार न बनाया जाए। संतों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि सनातन धर्म की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले किसी भी प्रयास का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

