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वाराणसी: राहुल गांधी, अवधेश प्रसाद और पप्पू यादव पर FIR दर्ज

धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप: जगद्गुरु बालक दास की अगुवाई में कोतवाली पहुंचे थे संत, दर्ज हुआ केस।

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वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): संसद भवन परिसर में सनातन धर्म के प्रतीक 'भगवा' ध्वज के कथित अपमान को लेकर धर्मनगरी काशी के संतों और धर्माचार्यों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। इस घटना से व्यथित काशी के संत समाज ने शनिवार को वाराणसी में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और संसद सदस्यों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई।

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पातालपुरी मठ के महंत जगद्गुरु बालक दास जी महाराज के नेतृत्व में संतों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल कोतवाली थाने पहुंचा। संतों ने पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में एफआईआर (FIR) दर्ज करने हेतु पुलिस को लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा।

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डीसीपी को सौंपा ज्ञापन, दी आंदोलन की चेतावनी

कोतवाली में प्रार्थना पत्र देने के साथ ही संतों के प्रतिनिधिमंडल ने डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल से मुलाकात कर उन्हें भी ज्ञापन सौंपा। संतों ने पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द वैधानिक कार्रवाई करने का आग्रह किया।

मीडिया से बातचीत करते हुए महंत जगद्गुरु बालक दास ने तीखे लहजे में कहा:

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"भगवा केवल एक रंग नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा और करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है। संसद जैसे पवित्र मंदिर में इसका अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि शासन-प्रशासन ने समय रहते आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो काशी का संत समाज सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।"

कोतवाली परिसर में गूंजे सनातन के नारे

प्रदर्शन के दौरान कोतवाली थाने के बाहर भारी संख्या में संतों और सनातन धर्मावलंबियों का जमावड़ा रहा। विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से प्रभु राम दास, जगदीश्वर, अनिल शास्त्री समेत काशी के कई प्रमुख धर्माचार्य और प्रबुद्धजन शामिल रहे। इस दौरान संतों ने भगवा के सम्मान में नारेबाजी करते हुए अपनी कड़ी नाराजगी जताई।

पुलिस ने दिया जांच का आश्वासन

संतों के उग्र रुख को देखते हुए कोतवाली पुलिस ने उनका प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि प्राप्त शिकायती पत्र के आधार पर मामले की प्रारंभिक जांच की जा रही है और नियमानुसार जो भी आवश्यक वैधानिक कदम होंगे, वे उठाए जाएंगे। फिलहाल पुलिस प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।