डिजिटल राजस्व प्रणाली से जनता को राहत, योगी सरकार का कदम सराहनीय: अधिवक्ता डॉ. देवेश श्रीवास्तव 'बच्ची'
राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण से सुशासन को मिलेगी रफ्तार; भूमि विभाजन, EWS प्रमाण-पत्र और खतौनी प्रक्रिया हुई पारदर्शी।
भदैनी मिरर (वाराणसी): उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा राजस्व सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने के उद्देश्य से लॉन्च किए गए तीन नए पोर्टलों का वाराणसी कलेक्ट्रेट परिसर (मामा की चौकी) के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. देवेश श्रीवास्तव ‘बच्ची’ ने पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने इसे प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और त्वरित न्याय व्यवस्था की दिशा में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम बताया।

डिजिटलीकरण से जनता को मिलेंगे यह प्रमुख लाभ
अधिवक्ता डॉ. देवेश श्रीवास्तव 'बच्ची' ने राजस्व विभाग के इन नए डिजिटल सुधारों की प्रमुख विशेषताएं साझा करते हुए बताया कि:
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धारा 116 के तहत पारदर्शी प्रक्रिया: भूमि विभाजन (बंटवारे) के लिए अब ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। इसके साथ ही नोटिस जारी करने, उद्घोषणा और लेखपाल रिपोर्ट की पूरी ट्रैकिंग ऑनलाइन मॉनिटरिंग के जरिए पारदर्शी होगी।
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GIS तकनीक का प्रयोग: भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तकनीक के माध्यम से अब भूमि की सटीक स्थिति और विवरण दर्ज होगा, जिससे जमीनी विवादों में भारी कमी आएगी।
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EWS प्रमाण-पत्र ऑनलाइन: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाण-पत्र बनवाने की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया गया है।
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खतौनी में सटीक विवरण: अब खतौनी में 6 दशमलव अंकों (Decimal Points) तक सटीक क्षेत्रफल दर्शाया जाएगा, जिससे जमीन की नापी को लेकर होने वाले असमंजस खत्म होंगे।
दफ्तरों के चक्कर काटने से मिलेगी मुक्ति
डॉ. देवेश श्रीवास्तव ‘बच्ची’ ने कहा कि व्यवस्था के इस डिजिटलीकरण से आम नागरिकों को अब सरकारी दफ्तरों व तहसीलों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे न सिर्फ समय और धन की बचत होगी, बल्कि दलाली प्रथा पर भी लगाम लगेगी और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से हर वर्ग को सुलभ न्याय मिल सकेगा।

