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क्वीयर ट्रांस महिला अधिकारों के समर्थन में वाराणसी के घाटों पर वॉक, राजेंद्र प्रसाद घाट से अस्सी घाट तक जागरूकता अभियान

Prismatic Foundation की पहल—लैंगिक समानता, LGBTQIA+ समुदाय के सम्मान और महिला अधिकारों को लेकर घाटों पर संवाद, नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

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वाराणसी। क्वीयर ट्रांस महिलाओं के अधिकार, लैंगिक समानता और विविध यौनिक पहचानों के सम्मान को लेकर रविवार को वाराणसी के घाटों पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम Prismatic Foundation की ओर से Rajendra Prasad Ghat से Assi Ghat तक घाट वॉक के रूप में आयोजित किया गया।

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दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चले इस कार्यक्रम में युवाओं, समुदाय के सदस्यों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य समाज में महिलाओं और LGBTQIA+ समुदाय के प्रति सम्मान, समानता और संवेदनशीलता को बढ़ावा देना था।

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घाट वॉक के जरिए जागरूकता

कार्यक्रम की शुरुआत Rajendra Prasad Ghat पर प्रतिभागियों के स्वागत के साथ हुई। इसके बाद आयोजकों ने कार्यक्रम के उद्देश्यों को साझा करते हुए बताया कि यह पहल समाज में लैंगिक समानता और हिंसा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए की जा रही है।

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पहले पड़ाव में प्रतिभागियों के साथ “सांप-सीढ़ी” खेल के माध्यम से महिला हिंसा और उससे जुड़े सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की गई। इस गतिविधि के जरिए लोगों ने खेल-खेल में समझने की कोशिश की कि समाज में मौजूद चुनौतियां महिलाओं के जीवन को किस तरह प्रभावित करती हैं।

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चौकी घाट पर खुला संवाद

इसके बाद प्रतिभागियों ने घाट वॉक करते हुए नारे, गीत और संवाद के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। दूसरे पड़ाव Chowki Ghat पर एक खुला संवाद आयोजित किया गया।

इस दौरान LGBTQIA+ समुदाय से जुड़े लोगों ने प्लेकार्ड्स के माध्यम से अपनी बात रखी और उपस्थित लोगों ने भी अपने अनुभव साझा किए। कई प्रतिभागियों ने अपने विचार स्टिकी नोट्स पर लिखकर साझा किए।

भदैनी घाट पर नुक्कड़ नाटक

तीसरे पड़ाव Bhadaini Ghat पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ट्रांस महिलाओं के अधिकार, भेदभाव और हिंसा के मुद्दों को उठाया गया। प्रस्तुति में विभिन्न किरदारों के माध्यम से समाज में मौजूद चुनौतियों और भेदभाव को दर्शाते हुए समानता का संदेश दिया गया।

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समापन में हुई चर्चा और सांस्कृतिक प्रस्तुति

कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव पर संगीत और समापन सभा आयोजित की गई। इस दौरान आयोजकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने समाज में विभाजन की राजनीति और हाशिए पर खड़े समुदायों के अधिकारों के मुद्दों पर अपनी बात रखी।

अतिथि के रूप में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ता कुसुम ने कहा कि यदि समाज को समान और गरिमापूर्ण बनाना है तो सभी वंचित समुदायों को एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी।

कार्यक्रम में इटली से आई अतिथि पैनलॉक ने संगीत के माध्यम से अपनी भावनाएं और पहचान साझा की। वहीं सिस्टर फ्लोरिन ने क्वीयर ट्रांस महिलाओं के अधिकार और उनके सम्मान की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल

कार्यक्रम का संचालन नीति ने किया, जबकि यात्रा का संचालन हेतवी और आरोही ने किया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस आयोजन में रूमान, कृष्णा, अनामिका, राधा, श्रेया, सैम, धनंजय, नैविश, सुजाता, रेनू देवी, समीक्षा झा, नैंसी, अक्षता और अंकु सहित कई प्रतिभागियों ने भाग लिया।

आयोजकों के अनुसार इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में समानता, सम्मान और संवेदनशीलता को मजबूत करना तथा क्वीयर ट्रांस महिलाओं और विविध लैंगिक पहचानों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

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