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Political Protest: 'EVM की तरह ही स्मार्ट मीटर से भी हो रही नोटों की चोरी', बहुजन मुक्ति पार्टी ने लालटेन लेकर किया प्रदर्शन, दी आंदोलन की चेतावनी

Varanasi: स्मार्ट मीटर और बढ़ती महंगाई के खिलाफ बहुजन मुक्ति पार्टी का हल्लाबोल, राष्ट्रपति के नाम एडीएम को सौंपा 15 सूत्रीय ज्ञापन

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वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): केंद्र सरकार की नीतियों, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और बिजली के स्मार्ट मीटरों में कथित धांधली के विरोध में 'बहुजन मुक्ति पार्टी' ने वाराणसी जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। देश के 625 जिलों में चलाए जा रहे तीन चरणों के 'राष्ट्रव्यापी आंदोलन' के तहत कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति महोदया को संबोधित एक विस्तृत 15 सूत्रीय मांग पत्र प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा।

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पार्टी पदाधिकारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण देश के बहुजन समाज, किसानों, श्रमिकों और मध्यम वर्ग की आर्थिक कमर पूरी तरह टूट चुकी है और इसके खिलाफ चरणबद्ध तरीके से आवाज उठाई जा रही है।

'स्मार्ट मीटर नहीं, यह नोट चोरी करने की मशीन है'

प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में बिजली के स्मार्ट मीटरों को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया। राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए निम्नलिखित मुख्य बिंदु रेखांकित किए गए:

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  • पारदर्शिता का अभाव: आंदोलनकारियों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह अपारदर्शी हैं। प्राइवेट कंपनियां इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की तरह गैर-कानूनी तरीके से कर रही हैं। जहां EVM वोटों की चोरी कर रही है, वहीं स्मार्ट मीटर यूनिट की चोरी कर जनता की जेब लूट रहे हैं।

  • $20\%$ से $30\%$ फास्ट चलने का दावा: आरोप लगाया गया कि ये मीटर सामान्य से $20-30\%$ तेज चल रहे हैं, जिससे अंधाधुंध बिल आ रहा है। माइनस बैलेंस ₹20 या उससे कम होते ही बिना पूर्व सूचना के तुरंत बिजली काट दी जाती है।

  • फर्जी बिलिंग: क्षेत्र में बिजली आपूर्ति सुचारू न होने के बावजूद उपभोक्ताओं पर भारी-भरकम बिल थोपे जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर जनता की आर्थिक लूट है।

घरेलू और कॉमर्शियल गैस की कालाबाजारी का मुद्दा गर्माया

स्मार्ट मीटर के अलावा पार्टी ने रसोई गैस और ईंधन की आसमान छूती कीमतों पर भी सरकार को घेरा। ज्ञापन में कहा गया कि घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमत ₹1500 से ₹2000 और कॉमर्शियल गैस की कीमत ₹2500 से ₹3500 तक पहुंच जाने से आम आदमी का जीना मुहाल हो गया है।

गैस एजेंसियों पर कालाबाजारी के आरोप: बहुजन मुक्ति पार्टी के नेताओं ने कहा कि गैस सिलेंडरों की किल्लत पैदा कर दी गई है, जिससे उपभोक्ताओं को लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है। एजेंसियां अपने बिचौलियों के माध्यम से ब्लैक में महंगे दामों पर सिलेंडर बेच रही हैं। कॉमर्शियल गैस महंगी होने से होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर हैं, जिससे बेरोजगारी और बढ़ रही है।

पार्टी की प्रमुख मांगें (Major Demands)

  1. पारदर्शी मीटर की बहाली: अपारदर्शी स्मार्ट मीटरों को तत्काल हटाया जाए और उनकी जगह ऐसे पारदर्शी मीटर लगाए जाएं जिन पर निजी कंपनियों का कोई नियंत्रण न हो।

  2. बिल वापसी व कार्रवाई: बिजली कटौती के बावजूद वसूले गए पैसे उपभोक्ताओं को वापस किए जाएं और इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने वाले चेयरमैन व कैबिनेट पर कड़ी कार्रवाई हो।

  3. गैस व ईंधन के दामों में कटौती: घरेलू गैस (14.2 किग्रा) को ₹400 में और कॉमर्शियल गैस (19 किग्रा) को ₹700 में उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा पेट्रोल की कीमत ₹90 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹80 प्रति लीटर नियत की जाए।

  4. श्रमिकों को मुआवजा: कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति और मंदी के कारण बंद हुए होटल-ढाबों के मालिकों को हुए नुकसान की भरपाई हो तथा वहां काम करने वाले श्रमिकों को मुआवजा दिया जाए।

625 जिलों में तीन चरणों में महाआंदोलन

पार्टी के प्रांतीय और स्थानीय नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन देशव्यापी है और तीन चरणों में आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत पहले चरण में देश भर के जिलाधिकारी कार्यालयों पर 'लालटेन भेंट' कर अनूठा विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार को बिजली के नाम पर हो रहे अंधेरे के प्रति जगाना था। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो आगामी चरणों में आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।

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