वाराणसी में कल सजेगा ‘पंच सम्मेलन’: 4 राज्यों के 500 ग्राम प्रधानों का महामंथन
डिप्टी सीएम केशव मौर्य और केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान रहेंगे मौजूद
वाराणसी: धर्म और संस्कृति की नगरी काशी (Varanasi) एक बार फिर एक बड़े महामंथन की गवाह बनने जा रही है। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से 16 जुलाई 2026 को वाराणसी के सिगरा स्थित 'रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर' में भव्य ‘पंच सम्मेलन’ का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में देश के चार प्रमुख राज्यों के लगभग 500 ग्राम पंचायत प्रधान हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं।


इस बेहद खास सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान और उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे।
क्या है 'पंच सम्मेलन' का मुख्य एजेंडा?
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर ग्रामीण शासन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और मजबूत बनाना है।

-
नए अधिनियम पर चर्चा: पंच सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य ग्राम प्रधानों को 'वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025' के विभिन्न प्रावधानों और इसके मूल उद्देश्यों से विस्तार से परिचित कराना है।
-
रणनीति और तैयारी: गांवों में इस अधिनियम को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से कैसे लागू किया जाए, इस पर सभी पंचायतों की तैयारियों का आकलन और चर्चा होगी।
-
पारदर्शिता और जवाबदेही: ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यों के बेहतर क्रियान्वयन, पारदर्शिता लाने और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय करने के तरीकों पर गंभीर विचार-विमर्श किया जाएगा।
-
विकास में जनभागीदारी: गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए योजनाओं के निर्माण में ग्राम प्रधानों के साथ-साथ आम ग्रामीणों की भागीदारी को सक्रिय रूप से बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
चार राज्यों से आ रहे हैं 500 ग्राम प्रधान: ये है आंकड़ा
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए चार पड़ोसी राज्यों से ग्राम प्रधानों को आमंत्रित किया गया है, जिनका ब्यौरा इस प्रकार है:
-
उत्तर प्रदेश: 350 ग्राम प्रधान
-
बिहार: 75 ग्राम प्रधान
-
झारखंड: 50 ग्राम प्रधान
-
उत्तराखंड: 25 ग्राम प्रधान
ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा
इस सम्मेलन के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण विकास से जुड़े सभी कार्यों को अधिक परिणामोन्मुखी (Result-oriented) बनाया जा सके। यह सम्मेलन ग्राम प्रधानों को गांवों के विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें अपने संवैधानिक व प्रशासनिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

