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एक तरफ विश्व वन दिवस का संकल्प, दूसरी तरफ करधना में कुल्हाड़ियों, आरीमशीन का प्रहार: आखिर जिम्मेदार कौन

लगभग एक सप्ताह पूर्व भी करधना गांव में कट चुकी है हरे नीम की पेड़

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हरे पेड़ की कटाई
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वाराणसी। जहाँ एक ओर पूरा देश 'विश्व वन दिवस' मना रहा है और पर्यावरण संरक्षण की शपथ ले रहा है, वहीं दूसरी ओर वाराणसी के मिर्जामुराद थाना अंतर्गत करधना गांव में रविवार को प्रकृति के साथ खिलवाड़ की शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहाँ प्रतिबंधित और हरे-भरे पेड़ों पर बेखौफ कुल्हाड़ियाँ और आरी मशीने चल रही हैं, जिससे विभाग के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। लगभग एक सप्ताह पूर्व भी इसी गांव में कट चुकी है नीम की हरे पेड़।
नियमों को ताक पर रखकर हो रहा कटान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करधना में बिना किसी ठोस अनुमति या कागजी कार्रवाई के धड़ल्ले से हरे पेड़ों को काटा जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि जहाँ सरकार हर साल करोड़ों का बजट पौधरोपण पर खर्च करती है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में फलने-फूलने वाले वृक्ष भू-माफियाओं और लकड़ी तस्करों की भेंट चढ़ रहे हैं।
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प्रशासनिक चुप्पी पर उठते सवाल
इस अवैध कटान ने स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही का जिम्मेदार कौन है। वन विभाग: क्या वन विभाग के अधिकारी दफ्तरों में बैठकर केवल कागजी आंकड़े दुरुस्त कर रहे हैं। क्षेत्रीय वन रक्षकों की नाक के नीचे इतना बड़ा कटान कैसे संभव है। पुलिस विभाग: क्या स्थानीय पुलिस को इस अवैध गतिविधि की भनक नहीं है। या फिर जानबूझकर इन मामलों में आंखें मूंद ली गई हैं।पर्यावरण पर गहराता संकट, स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ गर्मी अपना प्रचंड रूप दिखा रही है और जलस्तर गिर रहा है, ऐसे में पेड़ों की कटाई सीधे तौर पर जनजीवन को प्रभावित करेगी। विश्व वन दिवस पर ऐसी घटना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। इस मामले में शिकायतकर्ता वन अधिकारी से इसकी शिकायत करता है वही डी.एफ.ओ. अधिकारी वाराणसी ने इस मामले कहा कि इसकी जाँच करवाई जाएगी जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
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अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद उच्चाधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं या फिर 'विश्व वन दिवस' के संकल्प केवल भाषणों तक ही सीमित रहेंगे।
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