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LGBTQ+ और ट्रांसजेंडर विषयों पर शोध को नया आयाम: काशी विद्यापीठ में राष्ट्रीय क्षमता-वर्धन कार्यशाला आयोजित

MGKVP ट्रांसजेंडर सेल, प्रिज्मैटिक फाउंडेशन और वसंता कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में जुटीं वाराणसी, लखनऊ व इलाहाबाद की अकादमिक हस्तियां; शोध में नैतिकता व गोपनीयता पर बल।

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वाराणसी (अकादमिक डेस्क): महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP) के ट्रांसजेंडर सेल, प्रिज्मैटिक फाउंडेशन (वाराणसी) और वसंता कॉलेज फॉर वुमेन (राजघाट) के स्पेक्ट्रम LGBTQIA+ क्लब के संयुक्त तत्वावधान में 28 सितंबर 2026 को ट्रांसजेंडर एवं LGBTQIA+ समुदायों से जुड़े विषयों पर एक-दिवसीय राष्ट्रीय क्षमता-वर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों और उनके शोध निदेशकों की ट्रांसजेंडर विषयक शोध पद्धतियों और व्यावहारिक दक्षताओं को मजबूत करना था।

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उत्तर प्रदेश की राज्यपाल की पहल पर स्थापित हुआ था सेल

कार्यक्रम की शुरुआत में ट्रांसजेंडर सेल के समन्वयक प्रो. संजय ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल व कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल एवं विद्यापीठ के माननीय कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि राज्यपाल महोदया के निर्देश पर जुलाई 2023 में काशी विद्यापीठ में ट्रांसजेंडर सेल का गठन किया गया था, जो इस समुदाय के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के प्रति जागरूक करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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प्रो. संजय ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य जेंडर, यौनिकता और LGBTQIA+ पहचानों पर शोध कर रहे शोधकर्ताओं को एक ऐसा अकादमिक मंच प्रदान करना है जहाँ वे अपनी शोध चुनौतियों, साक्षात्कार पद्धतियों और नैतिक मूल्यों की समझ को विशेषज्ञों के साथ साझा कर सकें।

10 पीएचडी शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र

कार्यशाला में वाराणसी, लखनऊ और इलाहाबाद से आए 10 पीएचडी शोधार्थियों ने अपने शोध कार्यों और जमीनी चुनौतियों पर प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से LGBTQIA+ समुदाय के सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, कानूनी, संस्थागत और सामुदायिक पहलुओं पर गहन विमर्श हुआ।

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  • मुख्य रिसोर्स पर्सन: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के शिक्षा संकाय की प्रो. मधु कुशवाहा ने शोधार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए शोध में नैतिकता, गोपनीयता, समुदाय के साथ सीधा जुड़ाव और शोधकर्ता की उत्तरदायी भूमिका पर विचार रखे।

  • विशेष वक्ता: वसंता कॉलेज फॉर वुमेन की डॉ. रचना पांडेय ने बताया कि उनके संस्थान में ट्रांसजेंडर विषय पर एक ऑनलाइन एडेड सर्टिफिकेट कोर्स संचालित होता है, जिसे कोई भी विद्यार्थी कर सकता है।

  • प्रिज्मैटिक फाउंडेशन की राय: संस्था की प्रतिनिधि नीति ने जोर दिया कि शोध केवल अकादमिक पन्नों तक सीमित न रहकर समुदाय के वास्तविक अनुभवों से जुड़े और प्रतिभागियों की गरिमा व सुरक्षा सुनिश्चित करे।

  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय का दृष्टिकोण: इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के प्रो. जय सिंह ने कहा कि ऐसे मंच शोधार्थियों के बीच भविष्य में सहयोगात्मक शोध की राह खोलते हैं।

आगामी 6 महीने में आयोजित होगी अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला

कार्यशाला के सफल समापन पर आयोजकों ने आगामी रणनीतियों की घोषणा की। यह तय किया गया कि ट्रांसजेंडर एवं LGBTQIA+ विषयों पर शोध के दायरे को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने के लिए अगले 6 महीनों के भीतर एक विशाल अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला (International Workshop) का आयोजन किया जाएगा।