नवरात्रि तृतीया: सौभाग्य गौरी के पूजन को उमड़े भक्त, चंद्रघंटा देवी के दर्शन के लिए काशी में लगी लंबी कतारें
वासंतिक नवरात्र की तृतीया तिथि पर भक्तों ने ज्ञानवापी क्षेत्र में सौभाग्य गौरी का पूजन किया; चौक स्थित चंद्रघंटा देवी और दुर्गामंदिरों में भी भारी भीड़।
Mar 21, 2026, 11:17 IST
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वाराणसी। वासंतिक नवरात्र का पुण्यमय वातावरण काशी में पूरी श्रद्धा के साथ व्याप्त है। तृतीया तिथि पर शनिवार को शहरभर के देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही श्रद्धालु सौभाग्य वृद्धि की कामना के साथ सौभाग्य गौरी के पूजन के लिए पहुंचने लगे। ज्ञानवापी क्षेत्र स्थित सत्यनारायण मंदिर में भगवती के दर्शन को महिलाओं, युवाओं और वृद्धों की लंबी कतारें लगी रहीं।
भोर में खुला मंदिर, जयकारों से गूंजा परिसर
ब्राह्म मुहूर्त में अर्चकों द्वारा आरती के पश्चात मंदिर के पट खोले गए। पट खुलने से पहले ही सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर द्वार पर एकत्रित हो चुके थे। वातावरण "जय मां गौरी" के जयकारों से गूंज उठा। दोपहर बाद तक निरंतर भक्तों का आगमन जारी रहा और दर्शन के लिए लंबी लाईनें लगी रहीं।


चंद्रघंटा देवी के दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब
सौभाग्य गौरी के साथ ही भक्तों ने चौक क्षेत्र में स्थित भगवती चंद्रघंटा के दर्शन कर पूजन-अर्चन किया। इसके अलावा दुर्गाकुंड स्थित दुर्गामंदिर, भदैनी के महिषासुर मर्दिनी मंदिर, संकठा मंदिर सहित कई शक्तिपीठों पर भी श्रद्धालुओं ने भोग-प्रसाद अर्पित किया।

घर-घर हो रहा दुर्गा सप्तशती का पाठ
जिन परिवारों ने अपने घरों में कलश स्थापना की है, वहां तीसरे दिन भी दुर्गा सप्तशती का पाठ आयोजित किया गया। कई स्थानों पर कर्मकांडी ब्राह्मणों द्वारा पूजन-विधि कराई गई, जबकि कई भक्तों ने स्वयं देवी की उपासना की।
तृतीया तिथि का विशेष महत्व

पंडित विनायक शास्त्री बताते हैं कि वासंतिक नवरात्र की तृतीया तिथि पर सौभाग्य गौरी के दर्शन से जीवन में परम सौभाग्य की प्राप्ति होती है। देवी की कृपा से रुके हुए कार्य सिद्ध होते हैं और भक्तों की सद्कामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
शास्त्रों में यह भी उल्लेख है कि 108 दिनों तक नियमित दर्शन करने से सभी मनोरथ पूरे होते हैं।
