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बिजली निजीकरण के खिलाफ आंदोलन : 14 दिसम्बर को दिल्ली में होगा राष्ट्रव्यापी आंदोलन का एलान

बिजली कर्मचारियों का 367 वें दिन आंदोलन जारी, निजीकरण का निर्णय वापस होने तक जारी रहेगा संघर्ष

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निजी कम्पनियों से कमीशन लेने के लिए किया जा रहा बिजली का निजीकरण

वाराणासी, भदैनी मिरर। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे संघर्ष के 367 वें दिन बिजलीकर्मियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा। वक्ताओं ने कहाकि यूपी में बिजली का निजीकरण निजी कम्पनियों से कमीशन लेने के लिए किया जा रहा है। इसका उपभोक्ता हित एवं घाटे से कोई लेना देना नही है और इसे बिजलीकर्मी कत्तई बर्दाश्त नही करेंगे। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि जबतक निजीकरण का आदेश सरकार वापस नही लेती आंदोलन जारी रहेगा। 

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वक्ताओ ने कहाकि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की चल रही प्रक्रिया और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में बिजली कर्मचारी संगठनो की किसान संगठनों और अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों के साथ संयुक्त संघर्ष पर सहमति हो गई है। इस सम्बंध में 14 दिसंबर को दिल्ली में मीटिंग बुलाई गई है जिसमें संयुक्त संघर्ष की रणनीति तय की जाएगी और आंदोलन के कार्यक्रमों की घोषणा की जायेगी। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की कल रात ऑनलाइन हुई मीटिंग में यह निर्णय लिया गया।

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ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने बताया कि नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की मीटिंग में लिए गए निर्णय के अनुसार किसान संगठनों और अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों की इस बात पर सहमति हो गई है कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 संपूर्ण बिजली क्षेत्र का निजीकरण करने के लिए लाया गया है। इसका राष्ट्रव्यापी विरोध किया जाना बहुत जरूरी है। इस दृष्टि से बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति, नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स ने 14 दिसम्बर को दिल्ली में बैठक बुलाई है। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर एक साल से अधिक समय से निजीकरण के विरोध में संघर्ष कर रहे हैं। इसी बीच भारत सरकार ने पूरे देश के ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण करने के लिए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इसके अतिरिक्त ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में लिए गए निर्णय के अनुसार राज्यों पर यह दबाव डाला जा रहा है कि केंद्र सरकार तभी वित्तीय  सहायता देगी जब राज्य निजीकरण के तीन विकल्पों में से एक विकल्प को स्वीकार करें।

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उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों की निजीकरण की कोशिशों को देखते हुए बिजली के निजीकरण के विरोध में सारे देश के कर्मचारियों के साथ किसान और मजदूर संगठन भी आ गए हैं। यदि इस बीच पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का टेंडर प्रकाशित किया गया तो पूर्व निर्णय के अनुसार तमाम बिजली कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर और इंजीनियर सामूहिक जेल भरो अभियान प्रारंभ कर देंगे। इसकी सारी जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन की होगी। सभा को अंकुर पाण्डेय, धर्मेन्द्र यादव, कृपाल सिंह, विशाल कुमार, मनोज यादव, सुरेश सरोज, नागेंद्र कुमार, उमेश यादव, योगेंद्र कुमार, गुलजार अहमद, धनपाल सिंह आदि ने संबोधित किया।
 

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