वाराणसी: राष्ट्रीय लोक अदालत में 4.81 लाख से अधिक मामलों का निस्तारण, करीब ₹16.93 करोड़ की वसूली
जिला जज संजीव शुक्ला ने किया शुभारंभ; 17 वैवाहिक जोड़ों को फिर से साथ रहने के लिए किया प्रेरित, लोक अदालत को बताया परिवारों को जोड़ने का माध्यम
वाराणसी। जनपद न्यायालय परिसर में आयोजित National Lok Adalat का शुभारंभ शनिवार को दीवानी सभागार में जिला जज Sanjeev Shukla द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लोक अदालत केवल विवादों के निस्तारण का माध्यम ही नहीं, बल्कि परिवारों और समाज को जोड़ने का भी महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरी है।


अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि लोक अदालत की अवधारणा भारत में नई नहीं है। प्राचीन समय से ही समाज में पंचायत व्यवस्था और आपसी संवाद के माध्यम से विवादों का समाधान किया जाता रहा है। वर्ष 1987 में लागू अधिनियम के माध्यम से इस परंपरा को विधिक मान्यता प्रदान की गई।

जिला जज ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से बिना समय गंवाए गंभीर से गंभीर मामलों का भी आपसी सहमति से समाधान संभव है। उन्होंने पारिवारिक मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और न्यायालय की भूमिका परिवारों में समरसता बनाए रखने में बेहद अहम है। उनका कहना था कि न्यायालय का उद्देश्य परिवारों को जोड़ना है, न कि उन्हें अलग करना।

कार्यक्रम में Aniruddh Kumar Tiwari भी उपस्थित रहे। उन्होंने पारिवारिक न्यायालय के माध्यम से 17 वैवाहिक जोड़ों को पुनः साथ रहने के लिए प्रेरित किया।
इस दौरान बनारस व सेंट्रल बार के महामंत्री एवं राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी Alok Kumar, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव Praveen Kumar तथा Union Bank of India के जीएम B. N. Singh समेत सभी न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
इतने मामलों का हुआ निस्तारण
राष्ट्रीय लोक अदालत में जनपद न्यायालय वाराणसी से कुल 44,712 मामलों का निस्तारण किया गया, जिनसे ₹6,64,37,588.47 की धनराशि की वसूली हुई।
वहीं प्रशासन और अन्य विभागों द्वारा 4,36,502 मामलों का निस्तारण करते हुए ₹10,29,13,390 की धनराशि की वसूली के लिए समझौता कराया गया।
यदि कुल आंकड़ों की बात करें तो न्यायालय और प्रशासन के विभिन्न विभागों द्वारा मिलाकर 4,81,214 मामलों का निस्तारण किया गया, जिससे कुल ₹16,93,50,978.47 की धनराशि की वसूली सुनिश्चित की गई।
अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से लोगों को कम समय में सस्ता और सुलभ न्याय मिलता है, जिससे अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है।
