मनरेगा बचाओ संग्राम: काशी में कांग्रेस का हल्ला बोल, उपवास के जरिए मोदी–योगी सरकार पर साधा निशाना
गांधी प्रतिमा पर उपवास, नेताओं के हाउस अरेस्ट का आरोप; कांग्रेस बोली— गरीबों की हत्या बंद करो
वाराणसी, भदैनी मिरर। मनरेगा योजना को कमजोर किए जाने और ग्रामीण मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों पर हो रहे कथित हमलों के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने रविवार को काशी में “मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत जोरदार प्रदर्शन किया। मैदागिन टाउनहाल स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास जिला एवं महानगर कांग्रेस कमेटी द्वारा गांधीवादी तरीके से उपवास रखकर केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया।



कार्यक्रम से पहले ही कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी–योगी सरकार के इशारे पर प्रशासन ने दमनात्मक कार्रवाई करते हुए कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने की कोशिश की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल, महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, युवा कांग्रेस अध्यक्ष चंचल शर्मा, नेता पार्षद दल गुलशन अंसारी समेत कई नेताओं के आवासों को पुलिस छावनी में तब्दील कर हाउस अरेस्ट का प्रयास किया गया।

इसके बावजूद प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल और महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे उपवास स्थल पर पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से उपवास कर सरकार की जनविरोधी और तानाशाही नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
“मनरेगा केवल योजना नहीं, कानूनी अधिकार है” – अजय राय

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं बल्कि संविधान से मिला काम का कानूनी अधिकार है। मोदी–योगी सरकार जानबूझकर इस योजना को कमजोर कर रही है ताकि गांवों में रोजगार खत्म हो, पलायन बढ़े और गरीब मजदूर अपने अधिकारों से वंचित हो जाएं।
उन्होंने कहा कि समय पर मजदूरी न देना, काम की मांग के बावजूद रोजगार न उपलब्ध कराना और पंचायतों के अधिकारों को छीनना सरकार की मजदूर विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। कांग्रेस इस दमन से डरने वाली नहीं है और मनरेगा की बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा।
“उपवास से सरकार की घबराहट उजागर” – राजेश्वर सिंह पटेल
जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां पूरी तरह जनविरोधी हैं। मनरेगा के जरिए गांव के गरीब, दलित, पिछड़े और मजदूर परिवारों को सम्मानजनक रोजगार मिलता है, लेकिन सरकार इस योजना को खत्म करने की साजिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि उपवास जैसे अहिंसात्मक आंदोलन से सरकार की घबराहट साफ दिख रही है, इसी कारण कांग्रेस नेताओं के घरों को पुलिस छावनी में तब्दील किया गया।
“पंचायत और मजदूर विरोधी कानून वापस हो” – राघवेंद्र चौबे
महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है और करोड़ों परिवारों का जीवन बचाया है। VB-GRAM-G जैसे कानून लाकर पंचायतों के अधिकार छीने जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर मजदूरों के हितों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस गांधी जी के सिद्धांतों पर चलते हुए शांतिपूर्ण संघर्ष कर रही है, लेकिन सरकार हर आवाज दबाने के लिए पुलिसिया दमन का सहारा ले रही है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
- काम के कानूनी अधिकार को सुरक्षित रखा जाए
- प्रत्येक कार्य की पूरी मजदूरी समय पर दी जाए
- पंचायतों के अधिकार मजबूत कर बहाल किए जाएं
- VB-GRAM-G कानून को तत्काल वापस लिया जाए
उपवास कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
उपवास कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल, महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे सहित प्रजानाथ शर्मा, दुर्गा प्रसाद गुप्ता, संजीव सिंह, विनोद सिंह, गिरीश पाण्डेय, राजीव गौतम, देवेंद्र सिंह, मयंक चौबे, राजेश त्रिपाठी, संतोष चौरसिया, प्रमोद वर्मा, मनोज वर्मा, असलम खान, पियूष श्रीवास्तव, आकाश त्रिपाठी, मनीष सिंह, संतोष मौर्य, कीर्ति पाण्डेय, अनिल पटेल, रामजी गुप्ता समेत **सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता** उपस्थित रहे।
