MGKVP: बनारस में पहली बार मीडिया के लिए ट्रांसजेंडर व क्वीयर संवाद कार्यशाला; समावेशी रिपोर्टिंग पर शिक्षाविदों और फाउंडेशन ने रखा विचार
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ट्रांसजेंडर सेल और प्रिज्मैटिक फाउंडेशन की "पहचानों के साथी" पहल; रूढ़िवादिता तोड़ने पर जोर
वाराणसी (भदैनी मिरर): सांस्कृतिक राजधानी बनारस में पहली बार मीडिया जगत और समाज को एक नई तथा प्रगतिशील दिशा देने के उद्देश्य से एक अनूठी कार्यशाला का आयोजन किया गया। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP) के ट्रांसजेंडर सेल और प्रिज्मैटिक फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में "पहचानों के साथी" पहल के अंतर्गत मीडिया पेशेवरों, संपादकों, कंटेंट क्रिएटर्स और पत्रकारों के लिए एक विशेष संवाद आधारित कार्यशाला आयोजित की गई। इसका मुख्य उद्देश्य LGBTQIA+ समुदायों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सम्मानजनक और समावेशी रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना है।


समावेशी समाज के निर्माण में मीडिया की भूमिका अहम: नीति
कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए प्रिज्मैटिक फाउंडेशन की 'नीति' ने कहा कि मीडिया समाज में जनमत तैयार करने और सामाजिक दृष्टिकोण को बदलने का सबसे सशक्त माध्यम है। LGBTQIA+ समुदाय के जीवन-अनुभवों, उनकी उपलब्धियों और चुनौतियों को सही संदर्भ में समाज के सामने प्रस्तुत करना एक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए बेहद जरूरी है। कार्यशाला में उपस्थित पत्रकारों और क्रिएटर्स को जेंडर, लैंगिकता की बुनियादी समझ और खबरों में इस्तेमाल होने वाली समावेशी भाषा के नैतिक प्रयोग के बारे में विस्तार से जागरूक किया गया।

राज्यपाल की प्रेरणा से काम कर रहा है काशी विद्यापीठ का ट्रांसजेंडर सेल: प्रो. संजय
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ट्रांसजेंडर सेल के समन्वयक प्रोफेसर संजय ने बताया कि महामहिम राज्यपाल उत्तर प्रदेश श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा और माननीय कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी के कुशल निर्देशन में जुलाई 2023 से इस सेल की स्थापना की गई है।

यह सेल परिसर और पूरे वाराणसी जिले में ट्रांसजेंडर, क्वीयर व अन्य यौनिक पहचान रखने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित करने, उनके खिलाफ होने वाले भेदभाव व हिंसा को समाप्त करने और एक सुरक्षित, गरिमापूर्ण करियर प्रदान करने के लिए निरंतर जागरूक अभियान चला रहा है।
बनी-बनाई रूढ़िवादी धारणाओं को तोड़ना जरूरी: प्रो. अनुराग कुमार
कार्यशाला में अपने विचार साझा करते हुए प्रो. अनुराग कुमार ने कहा, "हम ट्रांसजेंडर जीवन की चुनौतियों से जितना अधिक परिचित होंगे, हमारी सामाजिक सोच उतनी ही समृद्ध होगी। इस समूह पर समाज द्वारा थोपी गई बनी-बनाई रूढ़िवादी धारणाओं को तोड़े बिना सकारात्मक संवाद संभव नहीं है। ट्रांसजेंडर अस्मिता की दिल से स्वीकृति ही इस समाज की वास्तविक सफलता है।"
दिलचस्प कूटनीतिक गतिविधियों से सीखी रिपोर्टिंग की बारीकियां
कार्यशाला के दौरान प्रिज्मैटिक फाउंडेशन के 'टैन' द्वारा प्रतिभागियों को व्यावहारिक रूप से समझाने के लिए कई दिलचस्प गतिविधियां कराई गईं। इनमें "LGBTQIA+ से परिचय", "शब्दावली बाजार", "हेडलाइन: पास या फेल" और "नजर और नजरिया" जैसी एक्टिविटीज शामिल थीं, जिसके जरिए यह सिखाया गया कि किसी खबर की हेडलाइन या फोटो कैसे किसी समुदाय के प्रति संवेदनशीलता तय करती है।
कार्यक्रम का सफल संचालन रूमान, आदित्य और अर्जुन द्वारा किया गया, जबकि मुख्य अतिथि व आगंतुकों का स्वागत अनामिका ने किया। यह पहल वाराणसी के मीडिया वातावरण को अधिक जिम्मेदार और समावेशी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
