Varanasi Crime: वाराणसी में इनामी हिस्ट्रीशीटर अनिल यादव 'पट्टी' ने लगाई फांसी, हत्या-लूट समेत दर्ज थे दो दर्जन से अधिक केस!
वाराणसी (भदैनी मिरर): धर्मनगरी काशी के लक्सा थाना क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज इलाके के चिह्नित हिस्ट्रीशीटर अनिल यादव उर्फ पट्टी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। औरंगाबाद निवासी अनिल यादव की मौत की खबर मिलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहन तफ्तीश में जुट गई है।


हत्या, लूट और रंगदारी का आरोपी: दर्ज थे 24 से ज्यादा मुकदमे
आत्महत्या करने वाला अनिल यादव उर्फ पट्टी लक्सा थाने का एक कुख्यात और पुराना अपराधी था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 38A थी। अनिल के खिलाफ वाराणसी के अलग-अलग थानों में हत्या, लूट, जानलेवा हमला, रंगदारी और मारपीट जैसे गंभीर अपराधों के दो दर्जन (24) से अधिक मुकदमे दर्ज थे।

अतीत में अपराध की दुनिया में उसकी सक्रियता को देखते हुए पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था। इसके अलावा, गाजीपुर के रहने वाले काशी विद्यापीठ के एक छात्र की सिद्धगिरीबाग क्षेत्र में हुई चर्चित हत्या के मामले में भी अनिल का नाम प्रमुखता से सामने आया था।

लोहे की रॉड से तोड़ा दरवाजा, अस्पताल में डॉक्टरों ने घोषित किया मृत
परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार सुबह अनिल की पत्नी उसके कमरे पर खाना लेकर गई थीं। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने और आवाज देने के बाद भी जब अंदर से कोई हलचल नहीं हुई, तो उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी दी।
अनिल के छोटे भाई संतोष ने बताया कि अनहोनी की आशंका होने पर उसने लोहे की रॉड से कमरे का दरवाजा तोड़ा। अंदर जाने पर अनिल फंदे से लटका हुआ मिला। परिजनों ने आनन-फानन में दुपट्टा काटकर उसे नीचे उतारा और तत्काल कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल लेकर भागे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और विधिक कार्रवाई शुरू की।
जिला बदर के बाद मानसिक तनाव में था हिस्ट्रीशीटर?
मृतक के भाई संतोष ने पुलिस और मीडिया को बताया कि करीब दो महीने पहले प्रशासन द्वारा अनिल को जिला बदर (Expelled from District) किया गया था। परिजनों का आरोप है कि जिला बदर होने के बावजूद स्थानीय पुलिस उसे अक्सर हस्ताक्षर (हाजिरी) के लिए थाने बुला रही थी।
परिजनों का बयान: संतोष के मुताबिक, अनिल अक्सर परिवार से कहता था कि जब उसे कानूनी रूप से जिला बदर कर दिया गया है, तो बार-बार थाने क्यों बुलाया जा रहा है? परिजनों का दावा है कि पुलिस की इस कार्यप्रणाली और बार-बार के बुलावे के कारण वह काफी परेशान था और गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहा था।
पुलिस कर रही है मामले की जांच
स्थानीय लोगों के अनुसार, अनिल की पहली पत्नी की काफी समय पहले मौत हो चुकी थी, जिसके बाद उसने दूसरी शादी की थी। फिलहाल लक्सा थाना पुलिस आत्महत्या के सभी पहलुओं और कारणों की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, रिपोर्ट आने और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
