वाराणसी में वकीलों का महा-आक्रोश: लखनऊ लाठीचार्ज के विरोध में ठप रहा न्यायिक कार्य, कलेक्ट्रेट में जुलूस निकाल मुख्यमंत्री को भेजा पत्रक
Lawyers Protest in Varanasi: सेंट्रल बार और बनारस बार का फूटा गुस्सा; बिना नोटिस चैंबर तोड़े जाने और दमनकारी नीति पर भड़के अधिवक्ता, दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
वाराणसी (भदैनी मिरर ब्यूरो): लखनऊ में अधिवक्ताओं के ऊपर हुए लाठीचार्ज और बिना किसी पूर्व नोटिस के उनके चैंबर तोड़े जाने की घटना ने अब पूरे उत्तर प्रदेश में एक बड़े सियासी और प्रशासनिक उबाल का रूप ले लिया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी सोमवार, 18 मई को वकीलों का गुस्सा सातवें आसमान पर नजर आया। संयुक्त बार एसोसिएशन के आह्वान पर बनारस के वकीलों ने पूरी तरह से न्यायिक कार्य ठप रखा और कलेक्ट्रेट परिसर में जुलूस निकालकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया।


कलेक्ट्रेट में गूंजे नारे, डीएम पोर्टिको पर दिया धरना
सोमवार सुबह 10:00 बजे संयुक्त बार एसोसिएशन के सभागार में एक बेहद महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक बुलाई गई। इस बैठक की अध्यक्षता 'दी सेन्ट्रल बार एसोसिएशन' के अध्यक्ष श्री प्रेम प्रकाश सिंह गौतम (एडवोकेट) ने की और संचालन 'दी बनारस बार एसोसिएशन' के महामंत्री श्री सुधांशु मिश्रा (एडवोकेट) ने किया। बैठक में सेन्ट्रल बार के महामंत्री आशीष कुमार सिंह और बनारस बार के अध्यक्ष विनोद शुक्ला सहित सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। प्रस्तावक रंजन कुमार मिश्र व सूर्यभान सिंह के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर तत्काल न्यायिक कार्य से विरत रहने (हड़ताल) का फैसला लिया गया।

इसके बाद, आक्रोशित अधिवक्ता जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय के पोर्टिको तक पहुंचे। कलेक्ट्रेट परिसर में जबरदस्त प्रदर्शन और धरना देने के बाद वकीलों ने माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को संबोधित एक 4 सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी वाराणसी के माध्यम से सौंपा।

बार एसोसिएशन ने पास किए ये 4 मुख्य प्रस्ताव:
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कड़ी निंदा: लखनऊ में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे अधिवक्ताओं के ऊपर पुलिस द्वारा किए गए बर्बर लाठीचार्ज की संयुक्त बार घोर निंदा करती है।
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मुआवजा और इलाज: लाठीचार्ज में गंभीर रूप से घायल हुए पीड़ित अधिवक्ताओं के समुचित इलाज की व्यवस्था सरकार करे और उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए।
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चैंबरों का पुनर्निर्माण: छुट्टी के दिन, गलत तरीके से और बिना किसी पूर्व सूचना के जिन अधिवक्ताओं के चैंबरों को बुलडोजर से तोड़ा गया है, सरकार उन्हें तत्काल वापस बनाकर दे।
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दोषियों पर कार्रवाई: वकीलों पर लाठी भांजने वाले और इसका आदेश देने वाले दोषी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दंडित किया जाए।
चेतावनी: अधिवक्ताओं ने स्पष्ट लहजे में कहा कि यदि सरकार इन जायज मांगों को तत्काल नहीं मानती है, तो पूरे प्रदेश में एक वृहद और ऐतिहासिक आंदोलन शुरू होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
'सरकार रच रही कुचक्र, बिचौलियों को छोड़ सीधे पीड़ितों से बात करें सीएम'
मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दी सेंट्रल बार के महामंत्री आशीष कुमार सिंह ने कहा, "यह लाठीचार्ज केवल लखनऊ के वकीलों पर नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के अधिवक्ता भाइयों पर हुआ है। प्रशासन हमारी आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
वहीं, पूर्व महामंत्री और भावी अध्यक्ष प्रत्याशी शशिकांत दुबे (एडवोकेट) ने शासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, "अधिकारियों द्वारा हाई कोर्ट के आदेश का बहाना बनाया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि जिस लोकल बार और जिन अधिवक्ताओं के चैंबर तोड़े गए, उन्हें इस मामले में पार्टी (पक्षकार) तक नहीं बनाया गया। बिना पक्ष सुने यह दमनकारी नीति लोकतंत्र के लिए घातक है।" उन्होंने आगे कहा, "बनारस में भी विस्थापन और विस्तारण के नाम पर वकीलों को परेशान किया जा रहा है। देश की आजादी से लेकर कानून व्यवस्था को बनाए रखने में वकीलों का बड़ा रोल है। हम मुख्यमंत्री जी से मांग करते हैं कि वह किसी बिचौलिए के बजाय सीधे पीड़ित वकीलों से बात करें और उन्हें यथास्थान न्याय दिलाएं, वरना यह आक्रोश कल भी जारी रह सकता है।"
