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BHU में कुशाग्र अद्वैत को मिला 12वां रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता पुरस्कार

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में युवा कवि कुशाग्र अद्वैत को प्रशस्ति पत्र, शॉल और 10 हजार रुपये की पुरस्कार राशि देकर किया गया सम्मानित

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वाराणसी, भदैनी मिरर। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के हिंदी विभाग स्थित आचार्य रामचंद्र शुक्ल सभागार में इस वर्ष का 12वां रविशंकर उपाध्याय स्मृति युवा कविता पुरस्कार युवा कवि कुशाग्र अद्वैत को प्रदान किया गया। इस अवसर पर उन्हें प्रशस्ति चिन्ह, शॉल और 10 हजार रुपये की पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया गया।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि एवं मनोचिकित्सक डॉ. विनय कुमार ने कहा कि कुशाग्र अद्वैत संवेदना के उदात्तीकरण के कवि हैं। उनकी कविताएं समय के साथ संवाद करती हैं। उन्होंने कहा कि कुशाग्र की कविताओं से गुजरते हुए यह अनुभव होता है कि सत्य एक नहीं, बल्कि कई प्रकार के होते हैं और उनकी कविताओं का नैरेटिव ही काव्य का सत्य बन जाता है।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि कुशाग्र अद्वैत मानवीय त्रासदियों को रेखांकित करने वाले कवि हैं। उनकी कविताएं नए अनुभवों की कविताएं हैं, जिन्हें ‘उड़द की दाल’ जैसी रचनाओं में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी कविताओं में मौजूद आत्मपीड़न समय के साथ और अधिक बल, तेज और ओजस्विता में परिवर्तित होगा।

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पुरस्कृत कवि के प्रशस्ति पत्र का वाचन वरिष्ठ कवि एवं आलोचक प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने किया। उन्होंने कहा कि कविता ज्ञान से अज्ञान की यात्रा है और कुशाग्र की कविताओं में अलक्षित को लक्षित करने की कोशिश दिखाई देती है।

आत्मवक्तव्य देते हुए कवि कुशाग्र अद्वैत ने कहा कि कविताओं के माध्यम से ही सुदूर स्थानों की यात्राएं संभव हुई हैं। अभावों के जरिए उन्होंने कविता को करीब से जाना और कविता के माध्यम से परकाया प्रवेश जैसा अनुभव प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि कविता उन्हें दूसरे के जीवन में अपने लिए एक स्थान बनाने का अवसर देती है।

युवा कवि गौरव पांडेय ने कहा कि कुशाग्र की कविताओं की सबसे बड़ी ताकत उनका अनुभव और कहन शैली है। उनकी कविता ‘उड़द की दाल’ अपराध के भीतर मनुष्यता की तलाश करती है।

कार्यक्रम का संचालन युवा कवि डॉ. विंध्याचल यादव ने किया। स्वागत वक्तव्य डॉ. महेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वंशीधर उपाध्याय ने किया।

कविता गोष्ठी का भी हुआ आयोजन

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कविता गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि एवं मनोचिकित्सक डॉ. विनय कुमार ने की। इस सत्र में अमरजीत राम, गौरव पांडेय, विजय कुमार, गोविंद निषाद, गोलेन्द्र पटेल, कंचन सिंह, तापस शुक्ल, अपूर्वा श्रीवास्तव और पुरस्कृत कवि कुशाग्र अद्वैत ने अपनी कविताओं का पाठ किया।
इस सत्र का संचालन अमरजीत राम ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन मनकामना शुक्ल ने किया।

इस अवसर पर प्रो. बलिराज पांडेय, प्रो. आशीष त्रिपाठी, प्रो. प्रभाकर सिंह, डॉ. राजकुमार मीणा, संध्या राय, व्योमेश शुक्ल, प्रो. कृष्ण मोहन, डॉ. प्रियंका सोनकर, आलोक उपाध्याय, विकास यादव, नवनीत राय, डॉ. आर्यपुत्र दीपक, डॉ. शैलेन्द्र सिंह, गौतम तिवारी, डॉ. उदय पाल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
 

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