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काशी पहुंचे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य: बोले– राज्यसभा जाने का फैसला नीतीश कुमार का, सीएम चेहरे पर बचते रहे 

सर्किट हाउस में पदाधिकारियों और अधिकारियों के साथ की बैठक; गौ-रक्षा के मुद्दे पर कहा– यूपी में पहले से हो रही गाय की सुरक्षा

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शुक्रवार को अपने एक दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचे। काशी पहुंचने के बाद उन्होंने सर्किट हाउस में पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात की और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न योजनाओं व विकास कार्यों की समीक्षा की।

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इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने बिहार की राजनीति और गौ-रक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।

राज्यसभा जाने का फैसला नीतीश कुमार का

डिप्टी सीएम ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर कहा कि यह उनका स्वयं का निर्णय है। उनके ऊपर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया गया।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार देश के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और राजनीति में ऐसे निर्णय काफी महत्वपूर्ण होते हैं।

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हालांकि जब उनसे बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने इस पर चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसका होगा, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।


इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में हलचल

नीतीश कुमार के इस्तीफे की चर्चाओं के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कई राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के दबाव में आकर इस्तीफा दिया है। हालांकि इस पर डिप्टी सीएम मौर्य ने किसी तरह की टिप्पणी करने से परहेज किया।

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गौ-रक्षा पर बोले— यूपी में पहले से हो रही सुरक्षा

गौ-रक्षा और गाय को राज्य माता का दर्जा देने की मांग को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा लखनऊ कूच के सवाल पर भी केशव प्रसाद मौर्य ने प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले से ही गौ माता की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उनके अनुसार गौ माता के अंदर करोड़ों देवी-देवताओं का वास माना जाता है और हिंदू समाज में उनकी पूजा की जाती है।

परमिशन पर बोले— जिसे लेना है, वह जाने

लखनऊ में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर परमिशन के सवाल पर डिप्टी सीएम ने कहा कि जिन्हें परमिशन लेनी है, वे जानें और जिन्हें परमिशन देनी है, वे जानें। इस मामले में वह कुछ नहीं जानते।

गौरतलब है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गाय को राज्य माता का दर्जा देने की मांग को लेकर प्रदेश सरकार को 40 दिनों का समय दिया था। यह समय सीमा पूरी होने के बाद उन्होंने धर्मयुद्ध का ऐलान करते हुए लखनऊ कूच की घोषणा की है।
 

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