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आतंकियों के निशाने पर रही है काशी, चार बम धमकों से दहल गये थे लोग

दशाश्वमेध घाट से संकटमोचन, कैंट स्टेशन सीरियल ब्लाट, कचहरी और शीतला घाट धमाके 

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आतंकी वलीउल्लाह को वकीलों के दौड़ाए जाने के प्रतिशोध में हुआ था कचहरी धमाका 

वाराणसी, भदैनी मिरर। नाथों के नाथ श्रीकाशी विश्वनाथ की नगरी और सर्व विद्या की राजधानी काशी आतंकियों के निशाने पर रही है। आतंकियों ने वर्ष 2005 से 2010 तक जगह-जगह खूनी खेल खेला। हर बार काशी को दहलाने की कोशिशें हुईं। शुक्रवार को वाराणसी कचहरी को बम से उड़ाने की मेल से मिली धमकी के बाद बरती गई विशेष सतर्कता के बाद काशी में हुई आतंकी घटनाओं की पुरानी यादें ताजा हो गईं। कचहरी ब्लास्ट के आतंकियों को तो अबतक नही पकड़ा जा सका। हालांकि इस घटना को प्रयागराज के फूलपुर क्षेत्र के निवासी आतंकी वलीउल्लाह को वकीलों द्वारा दौड़ाये जाने के प्रतिशोध में आतंकियों ने अंजाम दिया था। लेकिन जांच एजेंसियां इसे स्वीकार नही करती। 

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वाराणसी में पहला आतंकी हमला 23 फरवरी 2005 को दशाश्वमेध घाट पर हुआ। चाय की दुकान से पास हुए बम ब्लास्ट में सात लोगों की मौत हुई थी। 16 लोग घायल हो गए थे। जांच एजेंसियों ने पहले इसे सिलेंडर ब्लास्ट बताया था, लेकिन बाद में उच्चाधिकारियों की जांच में इसे आरडीएक्स से किया गया धमाका बताया। एक साल बाद पांच मार्च 2006 में सीरियल ब्लास्ट हुआ। संकटमोचन मंदिर, कैंट स्टेशन पर एक के बाद एक बम धमाके हुए। दशाश्वमेध में एक कुकर बम बरामद किया गया। यह फटता तो मरने वालों की संख्या काफी ज्यादा होती। धमाके की साजिश रचने में प्रयागराज के फूलपुर के वलीउल्लाह को पकड़ा गया था। इस घटना में उसके साथी मोहम्मद जुबैर को नौ मई 2006 को जम्मू कश्मीर में एलओसी पर पुलिस मुठभेड़ में मारा गिराया था। वह बागपत के टाडा गांव का रहने वाला था। बशीर, जकारिया, मुस्तफीज जो बांग्लादेश के रहने वाले हैं इन्हें पुलिस आज तक नहीं पकड़ पाई है।

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जबकि कैंट स्टेशन और संकटमोचन मंदिर धमाके में 18 लोगों की मौत हुई और सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे। सीरियल ब्लास्ट के बाद लखनऊ पुलिस इलाहाबाद के फूलपुर निवासी वलीउल्लाह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद वाराणसी पुलिस उसे रिमांड पर लेकर कचहरी आयी। कोर्ट में पेशी के दौरान वकीलों ने वलीउल्लाह का केस लड़ने से मना कर दिया। यही नहीं आक्रोशित अधिवक्ताओं ने वलीउल्लाह को पीटने के लिए दौड़ा लिया था। वकीलों में आक्रोश को देखते हुए संकटमोचन व कैंट स्टेशन विस्फोट कांड गाजियाबाद कोर्ट ले जाया गया। खुफिया टीमों की जांच में सिमी और आइएम से जुड़े संदिग्ध आतंकी अब्दुल सुभान कुरैशी उर्फ तौकीर का भी नाम प्रकाश में आया।

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इसे अब भी स्वीकार नही किया जाता लेकिन यही सच था कि वलीउल्लाह को वाराणसी कचहरी में वकीलों के दौड़ाने की घटना का बदला लेने के लिए आतंकियों ने 23 नवंबर 2007 की दोपहर वाराणसी कचहरी के सिविल कोर्ट और कलेक्ट्रेट परिसर में लगातार दो बम धमाके किये। इस घटना में तीन अधिवक्ताओं सहित नौ लोगों की जान चली गई थी। इसके साथ ही 50 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इसके मुजरिम आज तक पकड़े नही गये। बाद में तो ऐसी स्थिति आई की तत्कालीन सरकार वलीउल्लाह पर से केस वापस लेने की पूरी तैयारी कर ली। विपक्षियों को खबर लगी तो विरोध शुरू हुआ। इसके कारण केस वापसी नही हो सकी। बाद मे सरकार बदली और वलीउल्लाह को गाजियाबाद कोर्ट ने दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई। फिर 
सात दिसंबर 2010 शीतला घाट पर गंगा आरती के दौरान ब्लास्ट हुआ। इस घटना में दो साल की बच्ची स्वास्तिका व एक महिला की मौत हुई थी।

 

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