बनारस में ज्वेलरी एग्जीबिशन के खिलाफ लामबंद हुए सर्राफा व्यापारी और कारीगर: स्थानीय व्यापार और आजीविका बचाने की उठी मांग
एग्जीबिशन के नियमों और खरीद-बिक्री की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल; कारीगरों के हितों की रक्षा के लिए प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे व्यापारी।
वाराणसी (भदैनी मिरर विशेष): विश्व की प्राचीनतम नगरी काशी में अपनी कला और शुद्धता के लिए देश-दुनिया में पहचानी जाने वाली सर्राफा मंडी अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। प्रस्तावित ज्वेलरी एग्जीबिशन के विरोध में बनारस के स्थानीय सर्राफा व्यापारी और पारंपरिक स्वर्णकार कारीगर पूरी तरह लामबंद हो गए हैं। व्यापारियों का साफ कहना है कि उनकी यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि स्थानीय व्यापार, छोटे कारोबारियों और पीढ़ियों से इस कला से जुड़े कारीगरों की रोज़ी-रोटी बचाने के लिए है।

एग्जीबिशन के नियमों और पारदर्शिता पर उठे सवाल
स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों की प्रमुख आपत्ति यह है कि इस तरह की प्रदर्शनियों में स्थानीय स्तर के छोटे व्यापारियों और पारंपरिक कारीगरों को उचित प्राथमिकता और अवसर नहीं दिए जाते हैं।
व्यापारी वर्ग ने एग्जीबिशन के दौरान होने वाली खरीद-बिक्री की प्रक्रिया, व्यापारिक नियमों के पालन और माल के संचालन की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका मांग है कि व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित नियमों के दायरे में होनी चाहिए, ताकि स्थानीय बाजार को नुकसान न पहुंचे।
सोने की खरीद और व्यापार पर बढ़ता दबाव
सर्राफा कारोबारियों ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों और ग्राहकों के क्रय संबंधी निर्णयों में बदलाव का सीधा असर स्थानीय दुकानों और कारीगरों की आय पर पड़ रहा है। ऐसे में इस तरह के बड़े आयोजनों से स्थानीय व्यापारियों के सामने प्रतिस्पर्धा का संकट और गहरा गया है, जिससे पारंपरिक स्वर्णकारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
लोकतांत्रिक तरीके से होगा संघर्ष, प्रशासन को सौंपा जाएगा ज्ञापन
व्यापारी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि उनका यह विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए है। बनारस की सर्राफा मंडी केवल एक बाजार नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सांस्कृतिक और व्यापारिक विरासत है, जिससे हजारों परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।
आने वाले दिनों में व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल इस संबंध में जिलाधिकारी महोदय को ज्ञापन सौंपकर स्थानीय व्यापार और कारीगरों के हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाने की मांग करेगा। आवश्यकता पड़ने पर इस गंभीर मुद्दे को प्रदेश सरकार के समक्ष भी उठाया जाएगा।
प्रमुख संगठनों का मिल रहा समर्थन
इस विरोध अभियान का नेतृत्व प्रमुख रूप से श्री नवनीत सर्राफ, श्री किशन सेठ स्वर्णकार, श्री शुभम सेठ ‘गोलू’, श्री अमन सर्राफ एवं श्री सूरज दयाल सेठ कर रहे हैं।
इसके साथ ही इस मुहिम को काशी सर्राफा मंडल, उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ और सोनार नरहरी सेना जैसे प्रमुख व्यापारिक व सामाजिक संगठनों का भी पूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ है, जिससे स्थानीय व्यापारियों की आवाज को और मजबूती मिली है।
