लखनऊ में शंकराचार्य के गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध के आगाज के समर्थन में काशी में गौभक्तों ने किया शंखनाद
गौमाता को राज्यमाता घोषित करने और गोकशी पर पूर्ण प्रतिबंध को लेकर शंकराचार्य है जनजागरण यात्रा पर
जबतक गौमाता की रक्षा का संकल्प सरकार नही लेती और घोषणा नही करती, चलता रहेगा आंदोलन
वाराणसी, भदैनी मिरर। काशी में गौभक्तों ने असि घाट पर शंखनाद कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध के समर्थन में शंखनाद किया। उत्तर प्रदेश सरकार के विरोध में गौभक्तों ने अपनी आवाज बुलंद की। गौरतलब है कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गोकशी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और गौमाता का राज्य माता का दर्जा देने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ की सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया था। इसकी समयावधि पूर्ण होने पर शंकराचार्य ने काशी से गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का शुभारम्भ किया। इसका आज लखनऊ में आगाज हो गया। इस मौके पर काशी के गौभक्त और शंकराचार्य के अनुयायी असी घाट पहुंचे। घाट पर सामूहिक रूप से शंखनाद किया गया। इस अवसर पर गौमाता ने भी शंखनाद स्थल पर पहुंचकर गौभक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया।



घाट पर शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने कहा कि सनातन धर्म की आत्मा गौमाता के प्राणों की रक्षा के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन जारी हैं। इसका व्यापक असर पूरे राष्ट्र पर पड़ रहा है और 100 करोड़ सनातनी जनता इस गौप्रतिष्ठा आंदोलन से मजबूती से जुड़ रही है। इसी क्रम में स्वामी अवमिक्तेश्वरानंद द्वारा बुधवार को लखनऊ में किए जा रहे गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद के समर्थन में काशीवासियों ने शंखनाद करके यह संदेश दिया है कि काशी उनके साथ है। कहा कि वह किसी भी राजनीतिक पार्टी के समर्थन में नहीं हैं। जो भी दल गौमाता के प्राणों की रक्षा का संकल्प लेगा, उसी को अपना समर्थन देंगे। दुख इस बात का है कि खुद को हिंदूवादी कहने वाली सरकार के शासन काल में गोकशी में वृद्धि हुई है। यह देश अब मांस निर्यात में दुनिया के दूसरे नम्बर पर पहुंच गया है। कहा गया कि गौमाता की रक्षा के लिए आवाज उठानेवालों पर तरह-तरह के जुल्म किये जा रहे हैं।

उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराये जा रहे हैं। अपने को सनातनी होने का दावा करनेवाली सरकार और उसमें शामिल लोगांं के लिए इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है। गौमाता सनातन धर्म की आत्मा है। इसके बावजूद इस सरकार में गौवंश और गौमाता को कत्लखाने भेजने के लिए तस्करी हो रही है। ऐसे में गौमाता की रक्षा के लिए आवाज उठानेवालों की आवाज दबाई जा रही है। लेकिन अब यह आवाज दब नही सकती। जनता भी सरकार की दोहरी नीति को समझ चुकी है। जब तक गौमाता को राष्ट्र में राष्ट्रमाता और सभी प्रदेशों में राज्यमाता घोषित नहीं किया जाता, गौभक्त चैन से नही बैठेंगे। गोविंद की इस भारत भूमि पर गौमाता का रक्त गिरना किसी हिंदू को स्वीकार नहीं है। शंखनाद कार्यक्रम में महामृत्युंजय मंदिर के महंत किशन दक्षिण, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, राकेश पाण्डेय, सरदार सतनाम सिंह, सुनील श्रीवास्तव, अरुण सोनी, प्रमोद वर्मा, संतोष चौरसिया, सदानंद तिवारी, पुलक त्रिपाठी, हिमांशु सिंह, के.के. द्विवेदी, किशन यादव, शशिकांत यादव, श्रीश तिवारी, मिर्ची दुबे, सुभाष सिंह, आशीष पाण्डेय, प्रदीप पाण्डेय आदि रहे।

