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IMS BHU: जूनियर डॉक्टर के सुसाइड प्रयास का मामला पहुंचा PMO, 55 दिनों से ICU में भर्ती

इंसुलिन ओवरडोज मामले में पीएमओ को भेजा गया पत्र, ड्यूटी रोस्टर और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की उठी मांग; निदेशक बोले- की जा रही है निगरानी

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वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) के सर्जरी विभाग की जूनियर डॉक्टर (जेआर) सत्या के आत्महत्या के प्रयास का मामला अब गरमाता जा रहा है। 13 मार्च को इंसुलिन की ओवरडोज लेकर अपनी जान देने की कोशिश करने वाली डॉक्टर सत्या पिछले 55 दिनों से आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही हैं। अब इस मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र भेजा गया है।

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यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने PMO से की शिकायत

यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) के सदस्य ऋषभ जायसवाल ने पीएमओ ग्रीवांस सेल को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में प्रमुख रूप से तीन मांगें रखी गई हैं:

  1. जूनियर डॉक्टरों के लिए निर्धारित ड्यूटी रोस्टर का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए।

  2. गंभीर हालत में भर्ती डॉक्टर सत्या के स्वास्थ्य की सटीक जानकारी सार्वजनिक की जाए।

  3. घटना के बाद आईएमएस प्रशासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट को सबके सामने लाया जाए।

क्या है पूरा मामला?

बिहार की रहने वाली 25 वर्षीय जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर सत्या ने 13 मार्च की दोपहर ट्रॉमा सेंटर के पीछे स्थित अपने किराए के कमरे में इंसुलिन की भारी मात्रा लेकर आत्महत्या का प्रयास किया था। उन्हें तत्काल सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के छठे तल पर स्थित आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। घटना के बाद सोशल मीडिया और छात्र संगठनों के माध्यम से रेजिडेंट डॉक्टरों पर काम के अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव के आरोप भी लगे थे।

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निदेशक ने दी सफाई

इस पूरे प्रकरण पर आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने बताया कि जूनियर डॉक्टर की देखरेख के लिए विशेषज्ञों की टीम लगी हुई है। उन्होंने कहा कि संस्थान में रेजिडेंट्स की ड्यूटी का समय निर्धारित कर दिया गया है और उसकी मॉनीटरिंग भी की जा रही है। रेजिडेंट्स की जो भी समस्याएं हैं, उनका त्वरित निस्तारण करने के लिए विभागीय स्तर पर टीमें बनाई गई हैं।

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