BHU ट्रॉमा सेंटर से गायब हुईं महत्वपूर्ण फाइलें! छात्र नेता शिवांश सिंह ने निदेशक को सौंपा ज्ञापन, उच्चस्तरीय जांच की मांग
दोषियों पर सख्त कार्रवाई और साक्ष्य सुरक्षा के लिए CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की अपील; जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न होने पर आंदोलन की चेतावनी।
वाराणसी / भदैनी मिरर नेटवर्क
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित ट्रॉमा सेंटर से महत्वपूर्ण सरकारी फाइलों के संदिग्ध परिस्थितियों में गायब होने का मामला गरमा गया है। इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बीएचयू के छात्र नेता शिवांश सिंह ने इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IMS-BHU) के निदेशक को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।


छात्र नेता ने स्पष्ट किया है कि यदि समयबद्ध तरीके से दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो छात्र समुदाय इस मुद्दे को लेकर व्यापक स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
"पूर्वांचल की जीवनरेखा है ट्रॉमा सेंटर, फाइलों का गायब होना गंभीर"
निदेशक को सौंपे ज्ञापन में छात्र नेता शिवांश सिंह ने कहा कि बीएचयू का ट्रॉमा सेंटर पूर्वांचल सहित आसपास के कई राज्यों के लाखों मरीजों की जीवनरेखा है। ऐसे अति-महत्वपूर्ण संस्थान से सरकारी फाइलों का संदिग्ध परिस्थितियों में गायब होना अत्यंत गंभीर मामला है।

उन्होंने कहा, "यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का विषय नहीं है, बल्कि यह अस्पताल की कार्यप्रणाली, अभिलेखों की सुरक्षा और विश्वविद्यालय के प्रति जनविश्वास से जुड़ा हुआ बड़ा सवाल है। पूरे प्रकरण की समयबद्ध जांच कराकर दोषियों की पहचान की जानी चाहिए।"
साक्ष्यों से न हो छेड़छाड़, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग
छात्रों ने मांग रखी है कि जब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक ट्रॉमा सेंटर के सभी अभिलेखों, डिजिटल रिकॉर्ड्स और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए, ताकि किसी भी स्तर पर साक्ष्य (Evidence) से छेड़छाड़ न की जा सके।

इसके साथ ही, बीएचयू प्रशासन की साख और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।
"कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक स्तर पर उठाएंगे मुद्दा"
शिवांश सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ विश्वविद्यालय के नियमों और कानून के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। बीएचयू और सर सुंदरलाल चिकित्सालय की प्रतिष्ठा से समझौता नहीं किया जा सकता। यदि प्रशासन ने समय रहते पारदर्शी कार्रवाई नहीं की, तो छात्र संगठन सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
