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IIT(BHU) ने शुरू किया नया स्नातक पाठ्यक्रम, जानिए क्या-क्या हुए बदलाव

इंटरडिसिप्लिनरी माइनर, सेकंड मेजर और मल्टीपल एग्जिट विकल्प

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इसी सत्र से लागू होगी नई व्यवस्था, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार किये गए बदलाव, छात्रों को मिलेंगे ज्यादा विकल्प

वाराणसी, भदैनी मिरर।  आईआईटी (BHU) ने अपने बी.टेक पाठ्यक्रम को और बेहतर बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए हैं। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुसार किए गए हैं और इन्हें शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को ज्यादा विकल्प, अलग-अलग विषयों की पढ़ाई को बढ़ावा देना और उन्हें उद्योग के लिए तैयार करना है।

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2025-26 सत्र से छात्रों के पास चौथे सेमेस्टर के अंत में यह होंगे 5 शैक्षणिक विकल्प होंगे, जो मेरिट और पसंद के आधार पर तय होंगे। 
1. सामान्य बी.टेक डिग्री : छात्र अपनी मूल शाखा में बी.टेक पूरा करेंगे।
2. बी.टेक ऑनर्स : अपने ही विषय में अतिरिक्त स्ट्रीम लेकर छात्र ऑनर्स डिग्री प्राप्त कर सकते हैं।
3. बी.टेक माइनर के साथ छात्र किसी अन्य विषय में माइनर के रूप में 4 से 6 कोर्स (पांचवें सेमेस्टर से) कर सकते हैं।
4. बी.टेक सेकेंड मेजर के साथ  छात्र अपनी शाखा के साथ किसी अन्य शाखा में सेकंड मेजर लेकर 10 सेमेस्टर में कार्यक्रम पूरा कर सकते हैं।    
5. बी.टेक. के साथ एम.टेक. : छात्र एकीकृत ड्युअल डिग्री (आईडीडी) कार्यक्रम के तहत एम.टेक पूरा कर सकते हैं, जिससे पाठ्यक्रम की अवधि 10 सेमेस्टर तक बढ़ जाएगी।

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क्या है बीटेक माइनर डिग्री

यदि कोई छात्र बीटेक में किसी भी चार वर्षीय इंजीनियरिंग कोर्स में प्रवेश लेता है और अपने पांचवें, सातवें और आठवें सेमेस्टर में किसी अन्य इंजीनियरिंग ब्रांच के कम से कम चार और अधिकतम छह कोर्स की पढ़ाई उत्तीर्ण करता है, तो उसे दो स्ट्रीम की बीटेक माइनर डिग्री मिलेगी।

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बीटेक सेकेंड मेजर

बीटेक माइनर डिग्री करने वाला छात्र यदि इसी स्ट्रीम में दस सेमेस्टर की पढ़ाई उत्तीर्ण कर लेगा तो उसे बीटेक में दो इंजीनियरिंग की डिग्री (बीटेक सेकेंड मेजर) मिलेगी।

बीटेक माइनर से सेकंड मेजर में परिवर्तित करने का है आप्शन

शैक्षणिक कार्य के एसोसिएट डीन प्रोफेसर इंद्रजीत सिन्हा ने बताया कि जिन छात्रों ने सिर्फ बीटेक माइनर का आप्शन चुना और चार वर्ष का कोर्स पूरा करने के बाद यदि वे चाहें तो उपलब्ध सीटों और मेरिट के आधार पर अपना ऑप्शन बीटेक माइनर से सेकंड मेजर में परिवर्तित भी कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि छात्र 10 सेमेस्टर के भीतर एक ही विषय में बी.टेक और एम.टेक. की डिग्री के लिए एकीकृत दोहरी डिग्री (आईडीडी) कार्यक्रम कर सकते हैं। इससे छात्र एक ही विषय में 10 सेमेस्टर में दोनों डिग्रियां प्राप्त कर सकेंगे। बी.आर्क. के छात्र, जो पांच वर्षीय पाठ्यक्रम में होते हैं, वे भी माइनर और सेकंड मेजर विकल्पों के लिए पात्र होंगे। सेकंड मेजर लेने की स्थिति में अवधि छह वर्षों तक बढ़ सकती है।

प्रथम वर्ष के बाद शाखा परिवर्तन की व्यवस्था बंद

शैक्षणिक कार्य के अधिष्ठाता प्रोफेसर देवेंद्र सिंह ने बताया कि अब प्रथम वर्ष के बाद शाखा परिवर्तन की व्यवस्था को बंद कर दिया गया है। इसकी जगह छात्र अपनी मूल शाखा के साथ-साथ दूसरे विषयों में माइनर या सेकंड मेजर की डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि नए सत्र के पाठ्यक्रम की एक विशेषता यह भी है कि सभी बी.टेक शाखाओं में छठा सेमेस्टर औद्योगिक या शोध इंटर्नशिप के लिए आरक्षित किया गया है। इससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और उद्योग से जुड़ाव का लाभ मिलेगा। बताया कि एनईपी की लचीलापन आधारित शिक्षा नीति के अनुरूप संस्थान ने मल्टीपल एग्ज़िट फ्रेमवर्क भी लागू किया है। इसके अंतर्गत छात्रों को अर्जित क्रेडिट के अनुसार ये विकल्प मिलेंगे-

- एक वर्ष के बाद बीटेक छोड़ने पर इंटरिम लीविंग सर्टिफिकेट
- दो वर्षों के बाद डिप्लोमा सर्टिफिकेट
- तीन वर्षों के बाद बीएससी इन इंजीनियरिंग

छात्रों को रुचि और योग्यता के अनुसार अकादमिक यात्रा तय करने की स्वतंत्रता 

प्रोफेसर सिंह ने बताया कि आईआईटी (BHU) ने अंतः विषय शिक्षा को आगे बढ़ाते हुए मेडिकल डिवाइसेज़ में एम.टेक कार्यक्रम शुरू किया है, जो इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर के बीच सेतु का कार्य करेगा। इसके अतिरिक्त, सारस एआई Saras AI संस्थान के सहयोग से एक एआई आधारित इंडस्ट्री-फोकस्ड कोर्स और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के साथ एक स्टैंडर्ड-फोकस्ड पाठ्यक्रम भी प्रस्तावित किया गया है। आईआईटी के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि नया पाठ्यक्रम समग्र शिक्षा और इंटरडिसिप्लिनरी  संवाद को बढ़ावा देता है। यह छात्रों को उनकी रुचि और योग्यता के अनुसार अकादमिक यात्रा तय करने की स्वतंत्रता देता है। साथ ही उनके मूल विषय में मजबूत नींव भी सुनिश्चित करता है। आधुनिक समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह नया पाठ्यक्रम न केवल शैक्षिक दृष्टि से सक्षम है, बल्कि सामाजिक रूप से जागरूक और उद्योग-उन्मुख स्नातकों को तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।