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"अंतिम समय भी यहीं रहना चाहता हूं..."; BHU के डॉ. टी.के. लाहिरी ने घर जाने से किया इनकार

अस्पताल से अटूट लगाव: जिस सर सुंदरलाल अस्पताल को दिया पूरा जीवन, उसी को माना अपना घर

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वाराणसी (भदैनी मिरर)। “मैंने अपना पूरा जीवन इसी अस्पताल में मरीजों की सेवा में लगा दिया… अब इसे छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहता।”

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती पद्मश्री डॉ. टी.के. लाहिरी जी के इन शब्दों ने बुधवार को उनसे मिलने पहुंचे राष्ट्रीय बंग समाज के प्रतिनिधिमंडल को बेहद भावुक कर दिया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे बीएचयू के प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) डॉ. लाहिरी का हाल जानने के लिए राष्ट्रीय बंग समाज के अध्यक्ष देव भट्टाचार्य के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल अस्पताल पहुंचा था।

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मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने दी स्वास्थ्य की जानकारी

मुलाकात से पूर्व सर सुंदरलाल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट (MS) डॉ. पुनीत कुमार ने प्रतिनिधिमंडल को डॉ. लाहिरी के उपचार और स्वास्थ्य में हो रहे सुधार से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी, जिस पर प्रतिनिधियों ने पूर्ण संतोष व्यक्त किया।

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रिश्तेदार के घर जाने के आग्रह को ठुकराया

जब प्रतिनिधिमंडल डॉ. लाहिरी के वार्ड में पहुंचा, तो माहौल काफी भावुक हो गया। अपने निकट संबंधी सिद्धार्थ चक्रवर्ती को सामने देखकर डॉ. लाहिरी के चेहरे पर खुशी छलक आई। उन्होंने पुरानी यादें साझा कीं और सभी को आशीर्वाद दिया। इस दौरान जब सिद्धार्थ चक्रवर्ती ने उनसे स्वास्थ्य लाभ के लिए अपने घर चलने का आग्रह किया, तो डॉ. लाहिरी ने अस्पताल छोड़ने से साफ मना कर दिया।

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उन्होंने कहा कि जिस अस्पताल में उन्होंने अपना पूरा जीवन मरीजों की निस्वार्थ सेवा में समर्पित कर दिया, उसे छोड़कर वह कहीं नहीं जाएंगे और अंतिम समय तक इसी परिसर में रहना चाहते हैं। यह बात केवल एक इच्छा नहीं, बल्कि एक ऐसे कर्मयोगी चिकित्सक के अपने कार्यस्थल के प्रति अटूट प्रेम और निष्ठा की बानगी है।

स्वास्थ्य में सुधार, खुद पैदल चलकर गए

डॉ. लाहिरी अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की देखरेख और सेवा से पूरी तरह संतुष्ट दिखे। बातचीत के बाद वह स्वयं अपने कदमों से पैदल चलकर स्नान करने गए, जहाँ अस्पताल का स्टाफ उनके साथ मौजूद रहा।

प्रतिनिधिमंडल में जग्गनाथ घोष, रवि पाल, हरि प्रसन्न लाहिरी, पलाश बापी, मानिक दास और सिद्धार्थ चक्रवर्ती शामिल रहे। राष्ट्रीय बंग समाज ने निर्णय लिया है कि समाज का प्रतिनिधिमंडल नियमित रूप से अस्पताल जाकर उनके स्वास्थ्य का हाल-चाल लेता रहेगा।

लाखों लोगों की जिंदगियां बचाने वाले इस महामानव के जल्द स्वस्थ होने की कामना आज पूरा काशी क्षेत्र और चिकित्सा जगत कर रहा है।

क्या आप डॉ. टी.के. लाहिरी जी के बीएचयू में दिए गए योगदान या पद्मश्री सम्मान से जुड़ा कोई संक्षिप्त विवरण इसमें शामिल करना चाहते हैं?