ज्ञानवापी मूलवाद मामला 1991: अदालत में पक्षकारों की तीखी बहस, अब 23 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अनुष्का तिवारी ने वादमित्र की नियुक्ति पर उठाए सवाल; सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
वाराणसी / भदैनी मिरर:
काशी के बहुचर्चित ज्ञानवापी प्रकरण से जुड़े वर्ष 1991 के सबसे पुराने मूलवाद (स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर) मामले में शुक्रवार को वाराणसी की अदालत में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता, वादमित्र और मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने पक्ष में जोरदार दलीलें रखीं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई और बहस के लिए 23 सितंबर की तिथि तय की है।

वादमित्र की नियुक्ति पर याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अनुष्का तिवारी की ओर से बहस जारी रही। उन्होंने अदालत में वादमित्र (Next Friend) विजय शंकर रस्तोगी की नियुक्ति पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अनुष्का तिवारी के अधिवक्ता का आरोप था कि वादमित्र ने कथित तौर पर षड्यंत्र के तहत न्यायालय से यह दायित्व प्राप्त किया है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि यह वाद उनके आराध्य देव से संबंधित है, जिन्हें कानून की दृष्टि से 'शाश्वत नाबालिग' माना जाता है। ऐसे में यह संपूर्ण हिंदू समाज का वाद है, किसी व्यक्ति विशेष का निजी वाद नहीं हो सकता।
वादमित्र की आपत्ति और प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट पर दलील
दूसरी ओर, वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की तरफ से आवेदिका अनुष्का तिवारी के प्रार्थना पत्र पर अदालत में लिखित आपत्ति दाखिल की गई, जिसकी प्रति याचिकाकर्ता पक्ष को सौंप दी गई है। याचिकाकर्ता ने इस आपत्ति का प्रति-उत्तर (Rejoinder) अगली तारीख पर दाखिल करने की बात कही है।

बहस के दौरान वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने मजबूती से पक्ष रखते हुए कहा कि यह 1991 का मूलवाद 'प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रोविजंस) एक्ट, 1991' के किसी भी प्रावधान से बाधित नहीं होता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला और वक्फ बोर्ड का पक्ष
मामले में पक्षकार सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से भी दलीलें पेश की गईं। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के 12 दिसंबर 2024 के आदेश का हवाला देते हुए अदालत से कहा कि इस मामले में फिलहाल कोई अग्रिम कार्यवाही या अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
सभी पक्षों की प्रारंभिक दलीलों को दर्ज करने के बाद अदालत ने मामले को अगली सुनवाई यानी 23 सितंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।
