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वाराणसी में गौंड जनजाति का प्रदर्शन: जाति प्रमाण-पत्र निरस्तीकरण पर प्रदर्शन, अधिकारियों पर उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के आरोप

भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के नेतृत्व में पत्ते पहनकर अनोखा विरोध, “गाँड” और “गौड़” को अलग मानने पर उठे सवाल

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वाराणसी में गौंड अनुसूचित जनजाति के लोगों ने जाति प्रमाण-पत्रों के कथित मनमाने निरस्तीकरण और प्रशासनिक उत्पीड़न के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला महामंत्री अरुण कुमार गोंड के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

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पत्ते पहनकर किया अनोखा विरोध

प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पत्ते पहनकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अधिकारियों द्वारा उन्हें “आदिवासी जंगल में रहने वाले” जैसी अपमानजनक बातें कही जाती हैं, जिसके विरोध में उन्होंने यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।

शासनादेश और कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप

प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा उच्च न्यायालय के फैसलों, राष्ट्रीय आयोग के निर्देशों और राज्य सरकार के कई शासनादेशों की अनदेखी की जा रही है।

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समाज के लोगों का कहना है कि “गाँड” और “गौड़” एक ही जाति हैं और यह केवल उच्चारण का अंतर है, लेकिन सत्यापन के दौरान दोनों को अलग मानकर प्रमाण-पत्र निरस्त किए जा रहे हैं।

 प्रमाण-पत्र निरस्तीकरण पर उठे सवाल

आरोप है कि भू-राजस्व अभिलेख, परिवार रजिस्टर और विद्यालय के प्रमाण-पत्रों को भी मान्यता नहीं दी जा रही है। कई मामलों में लोगों को अन्य जातियों में दर्ज करने की कार्रवाई भी की जा रही है।

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भ्रष्टाचार के आरोप

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन आवेदन करने और सभी दस्तावेज जमा करने के बावजूद आवेदन निरस्त कर दिए जाते हैं। बाद में ऑफलाइन प्रक्रिया के नाम पर भ्रष्टाचार की कोशिश की जाती है।

प्रदर्शनकारियों की चेतावनी

प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे मामले को मुख्यमंत्री स्तर तक ले जाएंगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।

गौंड समाज के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि संविधान, आरक्षण अधिनियम 1994, शासनादेशों और न्यायालय के आदेशों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
साथ ही, जाति प्रमाण-पत्र निरस्तीकरण की वर्तमान प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की गई है।

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